मन मंदिर में है भगवान ,फिर भी तूँ क्यों इतना परेशान .

Jan 18 2016 10:02 PM
मन मंदिर में है भगवान ,फिर भी तूँ क्यों इतना परेशान .

मानव आत्मा में परमात्मा का वास होता है. मानव को यहां वहां भटकने की जरुरत नहीं बस अपने मन और विचारों में शुद्धता रखें जीवन में लोग यहां वहां भगवान के दर्शन के लिये जाते है. अच्छी बात है. जाना चाहिए पर यदि जाने के बाद आपका मन स्थिर नहीं है. आपके विचारों में खोट है. आपकी भावनाएं सही नहीं है. तो व्यर्थ है. सारे तीर्थ , नियम और धारणाएं .

किसी ने कहा है-   जप, तप ,तीरथ , संयम , नियम सब होते बेकार , जब तक मन में रहेगा बिकार ,

आपके मन की शुद्धता ही आपको महान बनाती है.मन की पवित्रता ही मानव को श्रेष्ठ बनाती है .कई बार यह होता है. की जो चीज, या बार्तालाप आपके अनुभव में नहीं होती है. तो आप कह देते है. की इसका कोई अस्तित्व ही नहीं है. आप बस इतना कहें कि उसके बारे में आप नहीं जानते।क्योकिं यह सत्य है. की इस संसार में भगवान है बस आपके मन और ध्यान की जरूरत है .

अगर आपके अंदर आध्यात्मिक विकास की गहरी लालसा है, अगर वह आपका लक्ष्य है, तो सबसे पहले आपको साफ-साफ पता होना चाहिए कि आपके अनुभव में क्या है और क्या नहीं। जो आपके अनुभव में है उसे आप जानते हैं। जो आपके अनुभव में नहीं है, आपको यह कहने की जरूरत नहीं है कि उसका अस्तित्व नहीं है। आप कहते होंगें की हमने भगवान को कभी देखा ही नहीं क्योंकि वास्तविकता तो यह है की आप के अंदर देखने की जिज्ञासा ही नहीं है , न चिंतन है पर आप किसी व्यक्ति विशेष के बारे में जानते है. की वह कहां रहता है, उसका नाम जानते हैं,

आप जानते हैं कि उसकी पत्नी कौन है, उसके बच्चे कितने हैं, क्योंकि वहां आपके जानने की इच्छा प्रवल है. आपका ध्यान वहां है. इसी तरह यदि आप अपने इस घट में सच्चे मन से झाकेँ चिंतन करें तो आपको भगवान का रूप दिखाई देगा जिस रूप में दर्शन करना चाहते है. उस रूप में ,बस आपके मन के विचारों और धारणाओं की ही तो प्रधानता है . आपके जीवन में विश्वास की ही तो महत्वता है. विश्वास ही मानव को आगे बढ़ाता है. उसे जीवन में सदकर्मों और भावों को प्रधान बनाता है .