'जमा मस्जिद की सीढ़ियां खोदकर निकाली जाएं श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं..', कोर्ट में वाद दाखिल, नोटिस जारी
'जमा मस्जिद की सीढ़ियां खोदकर निकाली जाएं श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं..', कोर्ट में वाद दाखिल, नोटिस जारी
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आगरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि संरक्षित सेवा ट्रस्ट ने सिविल जज कोर्ट में वाद दाखिल करते हुए जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबी भगवान केशवदेव की प्रतिमाओं को निकालने का आदेश देने की मांग की है. अदालत ने इस वाद को स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 31 मई तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के प्रमुख मनोज कुमार पांडे ने 11 मई को कोर्ट में यह वाद दाखिल किया है. सिविल कोर्ट ने इस मामले में सोमवार को इंतजामिया कमेटी शाही मस्जिद आगरा किला, छोटी मस्जिद दीवान ए खास, जहांआरा बेगम मस्जिद आगरा किला के सचिव, यूपी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के प्रमुख और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है. 

बता दें कि, मथुरा के भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुर हाल ही में आगरा में भगवत कथा करने के लिए गए थे. वे ट्रस्ट के संरक्षक भी हैं. भगवत कथा के दौरान देवकीनंदन ने मांग करते हुए कहा कि भगवान केशवदेव की मूर्तियों को हिंदुओं को सौंपा जाएं. अब ट्रस्ट ने आगरा सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें मांग की गई है कि मस्जिद की सीढ़ियों को खोदा जाए और प्रतिमाओं को निकाला जाए. 

ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज कुमार पांडे का कहना है कि, मुस्लिम लोग, नमाज के लिए मस्जिद में प्रवेश करते वक़्त हर दिन हमारे भगवान की मूर्तियों को अपने पैरों तले रौंदते हैं, यह हिंदू समाज और उनकी आस्था का घोर अपमान है. मुस्लिमों ने ठाकुर देवकीनंदन द्वारा की गई सीढ़ियां खोदने की अपील को ठुकरा दिया, ऐसे में हमारे पास कोर्ट जाना ही एकमात्र विकल्प बचा. मनोज पांडे ने दावा करते हुए कहा कि मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे भगवान कृष्ण की प्रतिमाएं दबे होने के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि उनके पास औरंगजेब के शासनकाल के दौरान लिखी गई एक पुस्तक की सामग्री है, जिसे वह कोर्ट में पेश करना चाहते हैं.

पांडे के अनुसार, ऐसी कई ऐतिहासिक रिपोर्टें हैं, जो यह प्रमाणित करती हैं कि औरंगजेब ने 1670 में केशवदेव मंदिर को ध्वस्त किया और आगरा में जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे केशवदेव की प्रतिमाओं को दफन कर दिया था. कई इतिहासकारों ने इसके संबंध में अपने लेखों में लिखा भी है. इन मूर्तियों को बचाया जाना चाहिए, ताकि मथुरा में उनकी पूजा हो सके. ट्रस्ट की कानूनी टीम में ब्रजेंद्र सिंह रावत, विनोद शुक्ला, कृष्णा रावत, दिलीप दुबे, नितिन शर्मा और अन्य लोग शामिल हैं. 

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