सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की संसद में कार्य न होने से जुड़ी याचिका

नई दिल्ली : बिना व्यवधान के संसद की कार्रवाई स्थगित करने की मांग को लेकर दायर की गई एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायालय अच्छे से जानता है कि उसे क्या करना है और उसकी सीमाऐं क्या है। दरअसल न्यायालय ने कहा कि ललित मोदी गेट कांड और व्यावसायिक परीक्षा मंडल के मसले पर कांग्रेस द्वारा गलत तरीके से संसद की कार्रवाई को बाधा पहुंचाने के मद्देनज़र एक जनहित याचिका दायर की गई थी। 

दरअसल यह याचिका 12 अगस्त को गैर सरकारी संगठन फाउंडेशन फाॅर रिस्टोरेशन आॅफ नेशनल वैल्यूज़ द्वारा दायर की गई थी। इस दौरान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एचएल दत्तू और न्यायमूर्ति अमिताराव राॅय की पीठ द्वारा दिशा-निर्देश तैयार किए गए थे। इस मामले में कानून बनाने की मांग की गई थी। मगर कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना था कि वह अपनी लक्ष्मण रेखा जानता है और वह इससे पार नहीं पा सकता।

मामले में एजीओ की ओर से यह कहा गया कि लोकतंत्र में सांसदों को यह जानकारी होती है कि आखिर उन्हें किस तरह से कार्य करना है। उन्हें कोई भी बात सिखाने की आवश्यकता नहीं होती है। यह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर है कि वह व्यवस्थापिका के कार्यों में दखल दे। उल्लेखनीय है कि यह एक तरह से दोनों ही स्तंभों में टकराव की स्थिति पैदा करता है। 

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