सुहाना नही लगता कुछ

ुम बिन,
सुहाना नही लगता कुछ,
तुम हो तो सब रसरंग,,
तुमसे ही श्रंगार संग,,,
जिंदगी उधार सी लग रही
अनमनी और अधकाटी सी,
सावन जलाता हुआ लग रहा
वर्षा की बुँदे रुलाती हुई सी ,,,
प्रिय तुम हो तो सब है
खुशियों के सागर तुम से
हिल्लोर मन की उमंग तुम
संग जीवन की प्रीति तुमसे,,

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