एक ही जगह समाया युगों-युगों का संसार, राजयोग में है शक्ति अपार

उज्जैन : दत्तअखाड़ा जोन में बड़नगर रोड़ के समीप बने विशाल पांडाल के मुख्य द्वार पर जैसे ही नज़र जाती है। कदम अपने आप ही यहां के ओम शांति परिसर में चल पड़ते हैं। जैसे ही मुख्यद्वार से अंदर की ओर जाते हैं यहां पर लहराती ध्वज पताका हमें धार्मिक भावनाओं से भर देती है।

दरअसल यह सब नज़र आता है उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ 2016 के महापर्व में। यहां कदम रखते ही एक ओर मंच से नौ देवियों का अंतरण होता दिखाई देता है तो उसी के पास मुरली बजाती भगवान श्रीकृष्ण की थ्रीडी झांकी लोगों का मन मोह लेती है। इस झांकी में भगवान श्री कृष्ण की अंगुलियां मुरली पर चलती हुई दिखाई देती हैं। यह अस्थायी आश्रम है प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय संस्थान का।

इस संस्थान में प्रवेश करते ही ब्रह्म कुमार और ब्रह्म कुमारियां सफेद परिधान में नज़र आते हैं। यहां पर पोस्टरों, झांकियों के माध्यम से व्यक्ति को राजयोग का महत्व बताया जा रहा है। राजयोग जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है और राजयोग की मान्यताऐं क्या है।

यह भी समझाया गया है। इसके अलावा श्रद्धालु यहीं पर श्री द्वादश ज्योर्तिलिंग के दर्शन कर पुण्य कमा सकते हैं। भगवान श्री शिव का अभिषेक भी यहां पर होता हुआ नज़र आ रहा है। इसी परिसर में अलग - अलग युगों के बारे में झांकियां निर्मित कर वर्णन समझाया गया है जो कि देखने वाले को बहुत ही मनोरम लगता है। 

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