गेलियों नीं है शिव, ऐड़ो है ऐड़ो.....!

Feb 27 2015 12:57 AM
गेलियों नीं है शिव, ऐड़ो है ऐड़ो.....!
बात मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की है। पिछले लंबे समय से राज्य के सिंहासन पर काबिज मुख्यमंत्री शिवराज न केवल ’अंधों में काना राजा’ के मुहावरे को चरितार्थ करने में जुटे हुये है बल्कि अपने ’शातिर दिमाग’ के कारण अच्छों-अच्छों को ओंधे मुंह भी गिराने में कामयाब सिद्ध हो रहे है। कहते है न कि जिस तरह से हाथी के दांत दिखाने के और खाने के कुछ ओर होते है, ठीक उसी तरह शिवराज सिंह चौहान की भी यदि बात की जाये तो अतिश्योक्ति नहीं हो सकती। चाहे व्यापमं घोटाला हो या फिर अन्य कोई विवादास्पद मामले ही क्यों न उछले हो, अपनी चाणक्य चतुराई से शिवराज साफ बच निकले और अपने विश्वासपात्रों को ’मरवा’ दिया....अर्थात उपर से गेलियों अंदर से चतुर....! वस्तुतः जिस तरह शिव को गेलियों या गेला गबला समझा जाता है, वैसे वे है नहीं....! चतुर सुजान है वे गेलियों नहीं पूरे-ऐड़े के ऐड़े है....और शायद यही कारण है कि अपने विरोधियों को ऐसी पटकनी दे देते है कि बापड़ा भूलकर भी उंगली उठाने की सोचे नहीं। यूं देखा जाये तो शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की जनता में लोकप्रियता की शिखर को प्राप्त कर रहे है। लाड़ली लक्ष्मी योजना से महिलाओं को अपना मुरीद बना चुके है, किसानों को लाभान्वित कर अपने को उनका ’अन्नदाता’ के रूप में प्रतिष्ठित कर चुके है, ऐसी कई योजनाओं को संचालित कर वाहवाही लूटने के लिये आगे रहते है, जो जनहित से जुड़ी हुई होती है, फिर भले ही उसका लाभ बीच के लोग ही लूटकर धनपति बनते रहे, बावजूद इसके उनकी ’चंट बुद्धि’ का ही यह कमाल है कि वे अपनी कुर्सी को आंच तक नहीं आने देते। दरअसल लोगों की नजरों में वे जितना सीधे-सादे प्रतीत होते है, यर्थाथ में वे इतने है नहीं, वरना व्यापमं की आग में कभी के वे भस्म हो जाते। परंतु ऐड़ा बनकर पेड़ा खाने वाले शिवराज ने पहले अपने खास लक्ष्मीकांत शर्मा को निपटाया और फिर एक के बाद ’लंगार’ लगाते हुये राज्यपाल तक पर आकर टिक गये....! अर्थात उनका अब कुछ कहा नहीं जा सकता....कि उनकी मिट्टी कब पलीत हो जाये! जुबान और दिमाग की जादूगरी का कमाल ही है कि ’उपर वालों’ ने ’कांग्रेसी जमाने के राज्यपाल’ के बीच में आने के लिये कह दिया कि जो होने दो अच्छा है, पहले ही कहा था कि हट जाओं, चलो व्यापमं के बहाने खूद ही निपट जायेंगे.....! भ्रष्टाचार की आंच स्वयं के साथ ही धर्मपत्नी साधना सिंह पर भी कई बार आ चुकी है परंतु मजाल है कि बाल भी बांका हो गया हो, उल्टे फंसाने वाला ही फंस गया....! खैर जो कुछ भी हो, शिव कमाल के मुख्यमंत्री है, तभी तो टिके हुये है, वरना और कोई होता तो कभी का पानी के बुलबुले की तरह प्रदेश की राजनीति के पृष्ठों में समाहित हो जाता....!