अजीब दस्तूर है दुनिया का

By Rahul Savner
Oct 01 2015 01:44 PM
अजीब दस्तूर है दुनिया का

तुम ख़ुशी की  चाह में रोये

हम दुखो की पनाह में रोये

अजीब दस्तूर है दुनिया का

तुम भरोसे के लिए रोये

और हम भरोसा कर के रोये

रात ने चाँद को याद किया

चाँद ने सितारों को याद किया

क्या कशिश है उसकी आखो में जो

हमने अपने प्यार को याद किया |