शायर की सुहागरात

शायर की सुहागरात

एक शायर की सुहागरात के दिन वह अपनी पत्नी से शायराना अंदाज में बोला,

प्रियतमा आज से तुम ही मेरी जानू हो |

तुम ही मेरी कविता हो |

तुम ही मेरी भावना हो |

तुम ही मेरी कामना हो |

यह सुन पत्नी शर्मीले अंदाज में बोली,

में भी सब कुछ भूल कर आज से आपको ही,

मेरा दिनेश ,मुकेश, और मोहन समझूगी |