सभी कष्टों से मुक्ति दिला सकती है शनैश्चरी अमावस्या, इस विधि से करें शनिदेव का पूजन

शास्त्रों में अमावस्या तथा पूर्णिमा दोनों ही तिथियों को बेहद अहमियत दी गई  है। 4 दिसंबर को मार्गशीर्ष मास की अमावस्या है। मार्गशीर्ष मास को अगहन मास भी बोला जाता है, इसलिए इस अमावस्या को अगहन अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस अमावस्या के दिन शनिवार है, इस वजह से इसकी अहमियत और भी बढ़ गई है। जब अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ती है तो इसे शनैश्चरी अमावस्या बोला जाता है। साढ़ेसाती, ढैय्या एवं शनि से जुड़े कष्टों से निजात पाने के लिए शनैश्चरी अमावस्या का दिन बहुत शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य की मानें तो शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनिदेव का खास पूजन करने से तमाम समस्याओं से निजात प्राप्त हो सकता है। जा​नें पूजन विधि।।।

घर पर इस तरह करें पूजन:-
अमावस्या के दिन प्रातः जल्दी स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। अब जमीन को साफ करके चौक बनाएं तथा एक लकड़ी के पाटे पर काला कपड़ा बिछाकर उस पर शनिदेव की मूर्ति, यंत्र या सुपारी रखें। सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित व धूप जलाएं। तत्पश्चात, शनिदेव पर अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुंकुम, काजल लगाकर नीले फूल चढ़ाएं। फिर शनिदेव को तेल में तली पूड़ी एवं तेल से बनी अन्य चीजों का भोग लगाएं तथा फल चढ़ाएं। 5, 7, 11 या 21 बार शनि मंत्र का जाप करें तथा शनि चालीसा का पाठ करें। इसके पश्चात् आरती करें।

मंदिर में भी दीपक रखना शुभ:-
यदि आपके घर के आसपास शनि मंदिर हो तो वहां अवश्य जाएं। मंदिर में शनिदेव की मूर्ति के सामने सरसों के तेल का दीपक व सरसों के तेल के बने मिष्ठान चढ़ाएं। पीपल के नीचे भी एक सरसों के तेल का दीपक रखें। इसके अतिरिक्त काले तिल, काली उड़द, काला कपड़ा, लोहे की कोई चीज और सरसों का तेल आदि सामर्थ्य के मुताबिक किसी जरूरतमंद को दान करें। इसके पश्चात् दशरथकृत शनि स्तोत्र का तीन बार पाठ करें। शनि मंत्र एवं शनि चालीसा पढ़ सकते हैं। ऐसा करने से शनि की महादशा के कष्ट कटते हैं तथा शनि की कृपा प्राप्त होती है।
 

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