SC ने रद्द की PFI के 8 सदस्यों की जमानत, कहा- 'आतंकवाद का आरोप और सिर्फ डेढ़ साल की जेल?'
SC ने रद्द की PFI के 8 सदस्यों की जमानत, कहा- 'आतंकवाद का आरोप और सिर्फ डेढ़ साल की जेल?'
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नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय से प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्यों को बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को पलट दिया है तथा सभी 8 आरोपी सदस्यों की जमानत रद्द कर दी है। PFI के इन 8 सदस्यों पर देशभर में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने का षड्यंत्र रचने का आरोप है। बीते वर्ष अक्टूबर में मद्रास उच्च न्यायालय ने इन आरोपियों को बेल दे दी थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय में चैलेंज किया गया था। बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस बेला माधुर्य त्रिवेदी की बेंच ने सुनवाई की। 

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, अपराध की गंभीरता और अधिकतम सजा के तौर पर जेल में बिताए गए केवल 1।5 वर्ष को देखते हुए हम जमानत देने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक हैं। न्यायालय व्यक्तिगत स्वतंत्रता देने वाले आदेशों में हस्तक्षेप कर सकती है, यदि वो गलत आधार पर दिए गए हों। जस्टिस त्रिवेदी ने अपने फैसले में कहा, जांच एजेंसी द्वारा हमारे समक्ष प्रस्तुत सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है। PFI के इन सदस्यों पर देश के खिलाफ षड्यंत्र रचने एवं आतंकी गतिविधियों में सम्मिलित होने के आरोप हैं। जमानत पर इनकी रिहाई रद्द करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अधिकतम सजा दी गई है। जबकि उन्होंने केवल 1।5 डेढ़ वर्ष कारावास में बिताए हैं। इस वजह से हम उच्च न्यायालय के जमानत पर रिहाई के फैसले में दखल दे रहे हैं। न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार करने से मना कर दिया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोच्च है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में ट्रायल में तेजी लाए जाने का भी निर्देश दिया है। 

इसके साथ ही ये कहा है कि इस जमानत का प्रभाव केस की मेरिट पर असर नहीं पड़ेगा। 8 अपराधियों में बरकतुल्ला, इदरीस, मोहम्मद अबुथाहिर, खालिद मोहम्मद, सैयद इशाक, खाजा मोहिदीन, यासर अराफात एवं फैयाज अहमद का नाम सम्मिलित है। सभी को केरल, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न भागों में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भारत एवं विदेशों में धन इकट्ठा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले अक्टूबर 2023 में मद्रास उच्च न्यायालय में जस्टिस एसएस सुंदर एवं जस्टिस एसएस सुंदर की डबल बेंच ने कहा था, अभियोजन इस न्यायालय के समक्ष अपीलकर्ताओं में से किसी एक की आतंकवादी कृत्य में सम्मिलित होने या आतंकवादी गिरोह या संगठन के सदस्य या आतंकवाद में प्रशिक्षण के बारे में कोई भी सामग्री पेश करने में असमर्थ रहा है। जस्टिस सुंदर मोहन ने इन सभी को जमानत दे दी थी। उच्च न्यायालय का कहना था कि PFI को आतंकवादी संगठन नहीं, बल्कि एक गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है। अभियोजन इस न्यायालय के समक्ष अपीलकर्ताओं में से किसी एक की भी आतंकवादी कृत्य में सम्मिलित होने या किसी आतंकवादी गिरोह या संगठन के सदस्य या आतंकवाद में प्रशिक्षण के बारे में कोई भी सामग्री पेश करने में असमर्थ रहा है। 

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