सावन में आने वाले 'मंगला गौरी व्रत' का महत्व

Aug 07 2018 10:38 AM
सावन में आने वाले 'मंगला गौरी व्रत' का महत्व

सावन के महीने में भगवान शिव के साथ हर मंगलवार को 'मंगला गौरी व्रत' मनाया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि यह व्रत स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभकारी है. दरअसल इस दिन गौरी के रूप में माता पार्वती की पूजा की जाती हैं. इसके अलावा बताया गया है कि सावन के महीने में आने वाले मंगलवार के व्रत-उपवास सुख-सौभाग्य बढ़ाते हैं.

अगर इस व्रत को सुहागने औरतें करती हैं तो उन्हें अखंड सौभाग्य मिलता है. मंगला गौरी व्रत करने वाली औरतें के घर में हमेशा सुख शान्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है क्योंकि माँ गौरी को गृहस्‍थ सुख की देवी मानी जाती है. मंगला गौरी व्रत के दौरान आप इन मंत्रो का जाप करें.

ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके।

हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके।।

 

देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः।

प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे।।

तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्।

वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने।।

 

मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले।

संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्।।

इस विधि करें पूजा :

सुबह जल्द यानिकि ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करने के बाद साफ-सुथरे धुले वस्त्र पहनें. इसके बाद आप एक साफ़ सुथरा सफ़ेद और एक लाल का रंग कपड़ा ले. इन दोनों कपड़ो पर चावल से नौ छोटी ढ़ेरी बना दें. इन्हे नवग्रह माना गया हैं. इसके अलावा आटे से बने दीपक में 16 बत्तियां जलाकर देवी के सामने रखी जाती हैं और पूजा शुरू करें. पूजा शुरू करने के दौरान आप सबसे पहले गणेश जी को याद करें. इस व्रत को करने से आपके ऊपर हमेशा माँ पार्वती की कृपा रहेगी.

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