कब बहक गए बेटे के कदम, पता नहीं चला
कब बहक गए बेटे के कदम, पता नहीं चला
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लखनऊ। उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज में यूपी एटीएस द्वारा किए गए एनकाउंटर में मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के पिता मोहम्मद सरताज अपने छोटे बेटे की मौत से दुखी जरूर हैं लेकिन उनका कहना था कि उसके गलत कार्य को लेकर उसका समर्थन नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो भी उसने किया वह गलत था। उन्होंने मांग की कि व्हाट्सएप जैसी मैसेंजिंग सर्विसेस पर रोक लगे। उनका कहना था कि बेटे के गुमराह होने की उन्हें जानकारी नहीं थी।

संसद में राजनाथ सिंह ने सैफुल्लाह के पिता सरताज की सराहना की थी। सरताज का कहना था कि एक दिन उसे डांट दिया। इसके बाद वह घर छोड़कर चला गया। इसके बाद वह नहीं मिला। हां करीब ढाई से तीन माह तक उससे बात भी नहीं हुई थी। इसी दौरान उसके कदम बहके। बड़े लड़के से कहा कि उसी पर घर की जिम्मेदारी है। सरताज का कहना था कि सैफुल्लाह किसी का भी मोबाईल उठा लेता था।

उन्होंने कहा कि हमारे घर में इस तरह की तालीम नहीं दी जाती थी। जब वह बाहर रहा तो बिगड़ गया। उन्होंने कहा कि उसने अपने भाई से कहा था कि वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का धन्यवाद दिया और कहा कि केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह हमें सलाम करते हैं हम उनके शुक्रगुजार हैं। वे महान आदमी हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने हम जैसे छोटे आदमी को सलाम किया हम उनका धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। उनका कहना था कि यदि आप अपने बच्चों पर बचपन से नजर रखें तो फिर उन्हें बचाया जा सकता है। आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता। फिर वे हिंदू परिवार के हों या फिर मुस्लिम परिवार के। उन्होंने कहा कि वह मोबाईल के बटन दबाता रहता था। बेटे के जाने का दुख उनके चेहरे पर झलक रहा था लेकिन उनका यही कहना था कि बच्चों को इन बातों से बचाना चाहिए और व्हाट्सएप जैसी चीजों से दूर रखना चाहिए।

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