नागरिकता बिल: असम ने मचा बवाल, एनआरसी है विरोध और हिंसा की मुख्य वजह

गुवाहाटी: हाल ही में पूर्वोत्तर के दो दलों को छोड़ कर ज्यादातर दलों ने संसद में नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में वोट दिया. इसके बावजूद खासतौर से असम में विरोध और हिंसा थमने का नाम नहीं ले रहा. सरकार का मानना है कि खासतौर से असम में जारी हिंसा और विरोध का कारण एनआरसी है. विरोध करने वालों में ऐसे तत्व शामिल हैं जिनका नाम एनआरसी में नहीं आ पाया है. जबकि दूसरा वर्ग वह है जिसे लगता है कि इस बिल के कारण एनआरसी से छूटे लोगों को मिलने वाली नागरिकता के कारण उनकी स्थानीय पहचान और महत्ता प्रभावित होगी.

जानकारी के नौसार हम, आपको बता दें कि इसी वर्ष 31 अगस्त को जारी एनआरसी में 19 लाख लोग जगह नहीं बना पाए. इनमें बड़ी आबादी मुसलमानों की है जबकि हिंदुओं की संख्या भी कम नहीं है. इस बिल के पारित होने के बाद एनआरसी में जगह बनाने में करीब 7 नाकाम रहे. 

लाख हिंदुओं की नागरिकता की राह आसान हो जाएगी: वहीं इस बात पता चला है कि बिल पर विदेश में हलचल ने बढ़ाई चिंता, कूटनीतिक संपर्क के लिए मिशनों को किया अलर्ट नागरिकता बिल की आंच देश से बाहर तक पहुंचने से सरकार चिंतित है. हालात से निपटने के लिए सरकार ने प्रमुख देशों में स्थित अपने मिशनों को अपने अपने यहां कूटनीतिक संवाद शुरू करने के लिए अलर्ट किया है. सरकार की योजना मिशनों के माध्यम से नाराज देशों को इस बिल की प्रासंगिकता के बारे में संतुष्ट करने की है. सरकार पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को ले कर चिंतित नहीं थी. इसी बीच बांग्लोदश के मंत्रियों का अपना भारत दौरा टालने से सरकार हरकत में आई. फिर पाकिस्तान की ओर से मुस्लिम देशों को इस बिल के खिलाफ एकजुट करने की कूटनीति की भनक लगते ही भारत ने जवाबी मोर्चो खोलने का निर्णय लिया.

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