दयालु स्वभाव के थे संत रविदास, हमेशा किया छुआछूत का विरोध

Feb 19 2019 11:40 AM
दयालु स्वभाव के थे संत रविदास, हमेशा किया छुआछूत का विरोध

आप सभी को बता दें कि आज संत रविदास जयंती है और संत रविदास जयंती हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ पूर्णिमा को मनाई जाती है. ऐसे में इस बार माघ पूर्णिमा 19 फरवरी को है यानी आज है और आज ही संत रविदास जयंती भी है. आप सभी को बता दें कि संत रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था और उनकी माता का नाम कलसा देवी और पिता का नाम श्रीसंतोख दास जी था. आइए जानते हैं कैसे मनाई जाती है रविदास जयंती.

संत रविदास जयंती - आज के दिन देशभर में इस जयंती को उत्साह के साथ मनाया जाता है. कहते हैं इस दिन लोग कीर्तन जुलूस निकालते हैं और इस दौरान गीत- संगीत, गाने, दोहे सड़कों पर बने मंदिरों में गाए जाते हैं. इसी के साथ संत रविदास जी के भक्त उनके जन्म दिवस के दिन घर या मंदिर में बनी उनकी छवि की पूजा करते हैं और संत रविदास जी का जन्म वाराणसी के पास के गांव में हुआ था. यही कारण है कि वाराणासी में संत रविदास जी का जन्म दिवस बेहद भव्य तरीके से मनाया जाता है. कैसे व्यतीत हुए संत रविदास जी का जीवन- कहा जाता है संत रविदास जी के पिता जूते बनाने का काम करते थे और रविदाज जी भी अपने पिता की जूते बनाने में मदद करते थे बस यही कारण था कि उन्हें जूते बनाने का काम पैतृक व्यवसाय के तौर पर मिला. वहीं उन्‍होंने इसे खुशी से इसे अपनाया और पूरी लगने के साथ वह जूते बनाया करते थे.

आप सभी को बता दें कि बचपन से ही साधु-संतों के प्रति संत रविदास जी का झुकाव रहा है और वह भजन गाने लगे. वहीं कहा जाता है उस समय समाज में फैले भेद-भाव, छुआछूत का वह जमकर विरोध करते थे और जीवनभर उन्होंने लोगों को अमीर-गरीब हर व्यक्ति के प्रति एक समान भावना रखने की सीख दी. इसी के साथ वह यह मानते थे कि हर व्यक्ति को भगवान ने बनाया है, इसलिए सभी को एक समान ही समझा जाना चाहिए. संत रविदास बहुत दयालु थे और वह हमेशा दूसरों की मदद करते नजर आते थे.

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