भारतीय नारियों को द्रौपदी की तरह होनी चाहिए..., पढ़िए राम मनोहर लोहिया के 7 अनमोल विचार

डॉ. राम मनोहर लोहिया भारत के स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य स्वतंत्रता सेनानियों में गिने जाते हैं. वे सभी की बराबरी में विश्वास रखते थे और भारत की जाति प्रथा के प्रखर विरोधी थे. देश की आजादी के बाद उन्होंने खुलकर पंडित जवहारलाल नेहरु की नीतियों का विरोध किया. वे आरक्षण का समर्थन करते थे और महिला सशक्तिकरण के समर्थक थे. आज उनकी पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं उनके 7 अनमोल विचार :-

1- अंग्रेजी का प्रयोग मौलिक सोच में अवरोध है, हीनता की भावनाओं का प्रजनक है और शिक्षित एवं अशिक्षित जनता के बीच की दूरी है. आइये, हम हिंदी की असल प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने के लिए संगठित हो जाएं.

2- यदि एक समाजवादी सरकार बल प्रयोग करे, जिसके परिणामस्वरूप कुछ लोगों की मौत हो जाए तो तो उसे शासन करने का कोई अधिकार नहीं है.

3- सामाजिक परिवर्तन के बड़े काम जब प्रारंभ होते हैं, तो समाज के कुछ लोग आवेश में आकर इसका पूर्ण विरोध करते हैं.

4- भारतीय नारी द्रौपदी जैसी हो, जिसने कि कभी भी किसी पुरुष से दिमागी हार नहीं खाई.

5- नारी को गठरी के समान नहीं बल्कि इतनी शक्तिशाली होनी चाहिए कि वक्त पर पुरुष को गठरी बना अपने साथ ले चले.

6- भड़भड़ बोलने वाले क्रांति नहीं कर सकते, ज्यादा काम भी नहीं कर सकते. तेजस्विता की जरूरत है बकवास की नहीं.

7- मर्यादा केवल न करने की नहीं होती है, करने की भी होती है. बुरे की लकीर मत लांघो, लेकिन अच्छे की लकीर तक चहल पहल होनी चाहिए.

खुशखबरी! रसोई गैस के पेमेंट पर मिल रहा है 10 हजार रुपये तक का सोना

क्या आपका भी है SBI में अकाउंट तो जल्द निपटा ले अपना काम? अगले 3 दिन तक बंद रहेगी ये सर्विस

भारत की अर्थव्यवस्था में एक बार फिर से हो सकता है सुधार: विश्व बैंक

 

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -