राहत की कोई शाम न दो

मेरी तकलीफ को राहत की कोई शाम न दो
मैं मुसीबत में पला हूँ मुझे आराम न दो

बोलना जब नहीं आता तो इशारा कैसा
जब जबाँ चुप है तो नजरों से भी पैगाम न दो

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