बांग्लादेश के हिन्दुओं का क्या कसूर ? विगत 9 सालों में 3600 बार कट्टरपंथी कर चुके हमला

ढाका: पाकिस्तान की सैन्य सरकार के जुल्म के खिलाफ लड़कर भारत की सहायता से वर्ष 1971 में आजादी पाने वाले पड़ोसी देश बांग्लादेश जो कि म्यांमार के रोहिंग्या संकट के वक़्त अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर काफी मुखर था, किन्तु वह आजकल अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसक हमलों को लेकर पूरे विश्व में आलोचना का शिकार हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र तक ने बांग्लादेश की सरकार से अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है. हिंसा की इन ताजा घटनाओं में कम से कम 6 लोगों की मौत हुई है और कई लोग जख्मी हुए हैं. कई पूजा पंडालों पर हमले हुए हैं जबकि हिंदुओं के गाँव के गाँव जला डाले गए हैं.

भारत के इस पड़ोसी देश में हिंसा का ये दौर शुरू हुआ 13 अक्टूबर के दिन, जब भारत सहित पूरे विश्व में रह रहे हिंदू नवरात्रि की अष्ठमी को देवी दुर्गा की पूजा के उल्लास में मगन थे. ऐसे समय में बांग्लादेश की राजधानी ढाका से 100 किलोमीटर दूर स्थित कोमिल्ला में धर्म से संबंधित एक अफवाह का सहारा लेकर हिंदुओं के खिलाफ भीड़ को उकसाया गया और दुर्गा पूजा पंडालों, मंदिरों और हिंदू लोगों के घरों पर हमले किए गए, तोड़-फोड़ और आगजनी की गई. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था AKS के मुताबिक, विगत 9 वर्षों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर 3679 बार हमले हुए हैं. इस दौरान 1678 मामले तो धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ और हथियारबंद हमलों के दर्ज हुए. इसके साथ ही घरों-मकानों में तोड़-फोड़ और आगजनी सहित हिन्दुओं को निशाना बनाकर लगातार हमले किए गए. विशेषकर 2014 के चुनावों में अवामी लीग की जीत के बाद हिंसक वारदातें बड़े पैमाने पर हुईं, जिनमें हिंदू समुदाय को निशाना बनाया गया. 9 वर्षों में हुए इन हमलों में हिंदू समुदाय के 11 लोगों की जान गई तो 862 लोग घायल हुए.

बता दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी लगभग 8.5 फीसदी है. शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के रिश्ते भारत से अच्छे माने जाते हैं. हिंदू समुदाय का वोट भी परंपरागत रूप से अवामी लीग के लिए तय माना जाता है. ऐसे में विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसके सहयोगी जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों की कट्टर नीतियां अल्पसंख्यक समुदाय के लिए हानिकारक मानी जाती हैं. इसी लिए अवामी लीग सरकार चुनावों से पहले हुए इन हमलों के पीछे षड्यंत्र का एंगल देख रही है.

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