इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यूरोपीय मॉडल अपनाने की तैयारी

नई दिल्ली : जल्द ही भारत में इलेक्ट्रिक वाहन दौड़ने लगेंगे . इसके लिए भारत ,यूरोपीय मॉडल अपनाने की तैयारी कर रहा है, ताकि वाहनों की चार्जिंग के लिए बुनियादी ढांचा खड़ा किया जा सके. एक रिपोर्ट के अनुसार सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने यूरोपियन कंबाइड चार्जिंग सिस्टम को अच्छा बताया है . जर्मनी और अमेरिकी कार निर्माता भी यही मॉडल अपना रहे हैं.यूरोपीय मानक पूरे विश्व में मान्य हैं .

बता दें कि फॉक्सवैगन, फोर्ड, डेमलर, जनरल मोटर्स, हुंडई , शेवरले, रेनॉल्ट, बीएमडब्ल्यू, फियेट जैसी दिग्गज वाहन कंपनियां भी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यही मॉडल अपनाती हैं. इस मॉडल को इसलिए तवज्जो दी जा रही है, क्योंकि इस यूरोपीय मॉडल अपनाने में ज्यादा निवेश भी नहीं लगेगा और वाहन उद्योग को बड़ा मशीनरी बदलाव नहीं करना पड़ेगा. भारत में टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनियों ने भी यूरोपीय मानकों पर ढले भारत ईवी स्टैंडर्ड का समर्थन किया है.

उल्लेखनीय है कि भारत ने वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत बैटरी चालित वाहन का लक्ष्य रखा है, क्योंकि तेल आयात के कारण अर्थव्यवस्था को लगातार नुकसान हो रहा है. चार्जिंग की इस व्यवस्था को लागू करने के लिए ऊर्जा मंत्रालय अभी नीति आयोग की मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहा है.जबकि इधर वाहन कंपनियों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है.हुंदै 2020 तक ईलेक्ट्रॉनिक वाहनों पर 67 अरब रुपये व्यय करेगी, वहीं मारुति गुजरात में 1151 करोड़ की लागत वाला लीथियम बैटरी प्लांट लगा रही है. जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा ने ईवी पर 951 करोड़ रुपये निवेश करेगी.

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