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'पीएम मोदी जिद्दी हैं, बात पर अड़े रहते हैं..', किस बात को लेकर प्रधानमंत्री पर भड़के सीएम गहलोत ?
'पीएम मोदी जिद्दी हैं, बात पर अड़े रहते हैं..', किस बात को लेकर प्रधानमंत्री पर भड़के सीएम गहलोत ?

जयपुर: राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने आज यानी सोमवार (5 जून) को पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी 'जिद' की वजह से ही भाजपा को हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में शिकस्त का मुंह देखना पड़ा है। इसके साथ ही सीएम गहलोत ने दावा किया कि अभी और राज्यों में भाजपा की सरकारें जांएगी, क्योंकि लोकतंत्र में क‍िसी की जिद नहीं चलती। दरअसल, गहलोत जयपुर में इंदिरा गांधी गैस सिलेंडर सब्सिडी योजना के प्रथम चरण का आगाज़ करते हुए 'राज्य स्तरीय लाभार्थी उत्सव' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। 

राज्‍य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने के अपने फैसले पर बात करते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा क‍ि उनकी सरकार ने इतना अहम निर्णय मानवीय दृष्टिकोण से पारित किया। गहलोत ने कहा कि, 'ये जो स्‍वास्‍थ्‍य का अधिकार कानून हमने पारित किया है, भारत सरकार को चाहिए कि वह इसकी समीक्षा कराए। पीएम मोदी को मैं इस मंच से कहना चाहूंगा, लोकतंत्र में जिद के लिए कोई जगह नहीं होता है। पीएम जिद्दी हैं, वे एक बार जो सोच लेते हैं उसी पर अड़े रहते हैं।' मुख्यमंत्री गहलोत ने आगे कहा कि लोकतंत्र में जनता की प्रतिक्रिया के आधार पर यह देखना चाहिए कि जनता क्‍या चाहती है और उसी के मुताबिक अपने दिमाग में परिवर्तन करते रहना चाहिए। 

इसके साथ ही गहलोत ने राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री के साथ हुई एक बैठक का किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि इस मीटिंग में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन सीएम जयराम ठाकुर ने पीएम मोदी के सामने राजस्‍थान सरकार के OPS संबंधी फैसले का उल्लेख किया था। गहलोत ने बताया कि ठाकुर ने उस समय प्रधानमंत्री को सही सलाह दी थी कि वह उन्हें भी राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री (गहलोत) की तरह OPS का फैसला लेने दें, मगर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह फैसला सही नहीं है। 
    
गहलोत के मुताबिक, 'मैंने उस वक़्त कहा था, प्रधानमंत्री जी आप जरा इसकी समीक्षा तो करवा लीजिए। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि, नहीं, नहीं मैं समीक्षा करवा चुका हूं।' गहलोत ने कहा कि, 'पीएम मोदी जिद पर अड़े रहे, जिद्दी हैं। आज देख लीजिए कि वो जिद क्‍या काम आई, सरकार चली गई हिमाचल में, कर्नाटक में। अभी तो और भी सरकारें जाएंगी। लोकतंत्र में जिद किसी की नहीं चलती। लोकतंत्र में घमंड किसी का नहीं चलता।'

OPS पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स, क्यों हुई थी बंद:-

बता दें कि, नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी भी पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने पर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि, 'इससे भविष्य के करदाताओं (Tax Payers) पर बोझ पड़ेगा। इस देश की राजकोषीय स्थिति को बेहतर करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की जरूरत है। OPS के फिर से बहाल होने को लेकर मुझे थोड़ी चिंता है। मेरे खयाल से यह चिंता का विषय है, क्योंकि इसका भार आज के करदाताओं पर नहीं, बल्कि भविष्य के करदाताओं और नागरिकों पर पड़ेगा।’ आर्थिक जानकारों का यह भी कहना है कि पहले से ही कर्ज में डूबे राज्यों के लिए यह योजना नई मुसीबत खड़ी कर सकती है। इससे आगामी सरकारों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ेगा। बता दें कि, OPS को 1 अप्रैल 2004 को केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार ने आर्थिक सलाहकारों से चर्चा करने के बाद ही बंद किया था और उसके बदले राष्ट्रीय पेंशन योजना (National Pension System) शुरु की थी थी। हालाँकि, अब कांग्रेस उसी OPS को मुद्दा बनाकर वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रही है, जिसे उसने ही बंद किया था। 

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