चाय से लोगों को बांट रहे विकास की मिठास

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने अपने पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को एक चाय वाले की तरह पेश किया. लोगों को खूब चाय पिलाई गई. चाय की चुस्कियों के ही साथ लोगों से नरेंद्र मोदी चर्चा करते और भाजपा अपना एजेंडा बताती. इस दौरान कई लोग भाजपा के चुनावी एजेंडे और चाय की मिठास में खो गए. लोग मोदी के इस अंदाज़ से बेहद खुश हुए. एक चायवाला लोगों को चाय बांट रहा था. अजी चाय क्या बांट रहा था वह तो लोगों को अच्छे दिन की बात कहकर अपने लिए वोट मांग रहा था. चाय की ये चुस्कियां रंग लाईं और भाजपा के अच्छे दिन आए. लोगों को भी अच्छे दिन आने की उम्मीद थी लेकिन क्वालिटी लाईफ को लेकर उन्हें महंगाई का सामना करना पड़ा।

मगर जनता के पास कोई विकल्प नहीं था और फिर भाजपा किसी न किसी क्षेत्र में अपने प्रोग्रेसिव काम बता रही थी हालांकि उसके वायदों को लेकर उसकी जमकर खींचाई की गई, मगर फिर भी लोगों को भाजपा से एक आस नज़र आई. दूसरी ओर भाजपा प्रारंभिक स्तर पर काम भी कर रही थी. प्रधानमंत्री जनधन योजना के चलते लोगों में बचत की आदत को विकसित किया गया. गैस सब्सिडी को लोगों के खाते तक पहुंचाया गया. यही नहीं रेलवे, सड़क, रक्षा, वित्त कई क्षेत्रों में सरकार ने विकास कार्य प्रारंभ किए. हालांकि इन क्षेत्रों में सरकार ने प्रारंभ में ही लंबी योजनाओं को महत्व दिया जबकि जनता को कुछ लघु अवधि की उम्मीद थी।

मगर फिर भी जनता के पास इस सरकार से कुछ आस लगी थी. अब सरकार अपने 2 वर्षों का कार्यकाल पूर्ण कर सामने आ रही है. एक उत्सव मनाया जा रहा है. फिर से लोगों से चाय पर चर्चा हो रही है. लोगों को अब न तो एक चाय वाला चाय पिला रहा है और न ही वह वोट मांग रहा है वह तो लोगों को चाय की चुस्कियों के साथ प्रगति का आनंद देने का प्रयास कर रहा है।

चाय पर चर्चा के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसी है तो दूसरी ओर सरकार विकासीय योजनाओं पर काम कर रही है. काले धन को लेकर बात जरूर धीमी हुई है लेकिन कांग्रेस को राजनीति के तराजू में तौल कर सरकार अपनी उपलब्धियों के वजन को बढ़ा रही है. ऐसे में पीएम मोदी चाय का स्वाद लोगों के मुंह में डाल रहे हैं साथ ही शकर सी मिठास घोलकर वे अपनी बात भी लोगों के मुंह में डाल रहे हैं।

'लव गडकरी'

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