पर्युषण के आगमन पर पढ़िए अहम विचार, जो जीवन को बनाएंगे और भी खास

जैन धर्म का प्रसिद्द और महापर्व पर्युषण कल यानी 6 सितंबर से शुरू हो गया है. यह खास जैन धर्म में मनाया जाता है लें यह एक यह एक सार्वभौम पर्व भी है. जैन धर्म के अनुसार इसमें आत्म उपासना की जाती है, साधना और त्याग का पर्व है जो बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है.

इतना ही नहीं संपूर्ण जैन समाज का यह महाकुंभ पर्व है एकता का प्रतीक है. पर्यूषण महापर्व का भी अपने आप में एक अलग महत्व है जो भादो कृष्ण त्रयोदशी से प्रारंभ होकर भादो शुक्ल पंचमी  यानी ऋषि पंचमी तक चलता है.

जानकारी के लिए बता दें, यह पर्व श्वेतांबरों में चलता है और ऋषि पंचमी से पूर्णमासी तक दिगंबरों में मनाया जाता है. इस पर्व में त्याग और तप है जिसे सभी श्रद्धा पूर्वक करते हैं. अलग-अलग मनाने के कारण ये पर्व कुल 8 दिनों तक चलता है. इसी के साथ 13 सिंतबर को संवत्सरी महापर्व को भी बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाएगा. 

पर्युषण के पर्व पर आज हम आपको कुछ ऐसे ही धार्मिक कथन  बताने वाले हैं जो आपके जीवन से जुड़े हैं. इन कथन से आपके जीवन में आपको एक अलग ही राह मिलेगी जिससे जीवन में ईश्वर के प्रति और भी आस्था बढ़ती है.

साथ ही बता दें, पर्युषण पर्व की श्रृंखला प्राचीन है कल्पसूत्र जैनागम में स्पष्ट उल्लेख है- आषाढ़ चातुर्मास के आरंभ से एक मास और 20 रात्रि व्यतीत होने और 70 दिन शेष रहने पर भगवान महावीर स्वामी ने पर्युषण पर्व की आराधना की थी. यह जैन धर्म निवृति प्रधान धर्म है जिसमें सभी लोग जप, तप ध्यान स्वाध्याय आदि में लीं रखते हैं और त्याग-वैराग्य पर बल दिया जाता है. 

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