तकलीफों की तह में बसर करती है सिंगल मदर

एक माँ वो जो एक पिता बनकर भी अपने बच्चे को संभाल लेती है क्या उसे माँ कहलाने का हक़ नहीं है क्या वो माँ नहीं होती...?? ये वो सवाल है जो आज के समय में हर उस व्यक्ति से हम करना चाहेंगे जो एक सिंगल मदर को बुरा-भला कहते हैं. आज की दुनिया से हम सभी वाकिफ है आज के समय में किसी भी सिंगल मदर का अकेले रहना किसी खतरे से कम नहीं है क्योंकि आजकल लोग भूखों की तरह व्यवहार करते है वह चाहते हैं कि उन्हें कोई तो मिले जिसकी वह टांग खींच सके, बुरा भला कह सके, परेशान कर सके. एक माँ जो अपने बच्चो के साथ अकेली रहती हो और अपने बच्चो के लिए माता और पिता दोनों बनकर उनकी देखभाल करती है उसकी जिंदगी कैसी होती हैं वो इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप समझ जाएंगे.

आज के समय में अगर एक महिला अपने पति से तलाक लेने के बाद अकेले रहने लगे और अपने बच्चो के लिए जॉब करने लगे, पैसे कमाने लगे तो उसे लेकर लोगों की सोच, समाज की सोच छोटी हो जाती है और सभी उसे घृणित नजरों से देखने लगते हैं. हर जगह उस महिला से एक ही सवाल किया जाता है "कहाँ है तुम्हारा पति, कहाँ है तुम्हारे बच्चो के पिता" बच्चो के स्कूल एडमिशन से लेकर महिला के डाक्यूमेंट्स तक एक ही सवाल होता है जो पुरुष से जुड़ा होता है.

तो क्या पुरुष के बिना महिला का कोई आधार नहीं है, क्या वह खुद अपनी पहचान नहीं है..? जब एक महिला अकेले जीवन व्यतीत करने लगती है तब उसका साथ देने हज़ारो आदमी आते है लेकिन उसका क्या जो उसे छोड़ चुका होता है. तलाक के बाद अगर एक महिला किसी पुरुष से दोस्ती कर ले तो वह समाज की नजरों में स्लट होती हैं क्योंकि वह तलाकशुदा हैं. एक तलाकशुदा महिला को समाज कभी स्वीकार नहीं करता लेकिन एक तलाकशुदा पुरुष को सभी स्वीकार करते हैं यहाँ तक की उसकी दोबारा शादी भी करवा दी जाती हैं लेकिन महिला की नहीं....

आज भी कई ऐसी जगहें हैं जहाँ पर एक विधवा महिला और एक तलाकशुदा महिला को घर से बाहर निकाल दिया जाता हैं, समाज से बाहर निकाल दिया जाता हैं और उसके बाद से कभी अपनाया नहीं जाता... लेकिन कब तक..? वो भी तो एक माँ, बहन, बेटी, पत्नी होती हैं जो दुःख, दर्द सहकर भी आह नहीं करती. एक माँ की कहानी ये भी हैं जिसे लोगों ने दो पहलुओं में बांटा हैं कुछ लोग उन्हें सिंगल मदर के नाम से पुकारते हैं तो जो समाज के कथित ठेकेदार उन्हें और भी घृणित नामों से पुकारते हैं.

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माँ

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