मैं दर्द छिपाता रहा

मैं दर्द छिपाता रहा

ैं दर्द छिपाता रहा , 
वो ज़ख़्म बनाती रही । 
मैं अश्क बहाता रहा , 
वो प्यास बुझाती रही ।। 
सिलसिला चलता रहा , 
यूँ ही चाहत का ख़्याल । 
मैं कांधों पे जाता रहा , 
वो मुस्कुराती रही ।।