कोई फरियाद मत करो

ोये हुये जनाब हैं, 
चेहरों की भीड़ में, 
कैसे करें तलाश जब पहचानते नहीं..!!
आवाज़ देकर के किसे, 
किसको पुकारें हम, 
नाम भी तो अजनबी का जानते नहीं..!!
कह दिया उनको खुदा, 
नाराज़ हो गये, 
बोले इबादत को तेरी हम मानते नहीं..!!
ख्वाब में बसते नहीं, 
जज्बातों के शहर, 
हम बेख्याली के ख्याल पालते नहीं..!!
काबिल नहीं हो तुम, 
कोई फरियाद मत करो, 
रिश्तों की डोर सबसे हम बाँधते नहीं..!!
आये हो "वीरान" क्यों, 
गुलशन में तुम मेरे, 
तेरी गली की धूल तो हम छानते नहीं..!! 

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