जानिए कौन हैं अमित खरे ? जो 2 सालों तक पीएम मोदी को देंगे सलाह

नई दिल्ली: अमित खरे को पीएम नरेंद्र मोदी का सलाहकार बनाया गया है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आदेश के अनुसार, वे दो साल तक इस पद पर बने रहेंगे। 1985 बैच के IAS अधिकारी खरे बीते 30 सितंबर को सचिव (उच्च शिक्षा) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उससे पहले वे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में भी रहे थे। बता दें कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में अमित खरे की नियुक्ति पूर्व कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा व पूर्व सचिव अमरजीत सिन्हा के इसी साल सलाहकार का पद छोड़ने के बाद की गई है। खरे पूर्ण पारदर्शिता के साथ स्पष्ट फैसले लेने वाले अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि अमित खरे ने दिसंबर 2019 में शिक्षा मंत्रालय (उच्च शिक्षा विभाग) के सचिव का पदभार ग्रहण किया था। उनकी नियुक्ति के कुछ ही समय के अंदर ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मंत्रिमंडल द्वारा 29 जुलाई 2020 को अनुमोदित किया गया था। अपने कार्यकाल में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कई क्रांतिकारी परिवर्तन किए। IIT, IIM जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने पर बल दिया। तकनीकी संस्थानों में इनोवेशन को बढ़ावा दिया। इसका लाभ देश की आवाम को कोरोना काल में देखने को मिला। अमित खरे उस समय सबसे अधिक चर्चाओं में आए थे, जब उन्होंने चारा घोटाले को उजागर किया था। दरअसल, अमित खरे ने चाईबासा उपायुक्त रहते हुए ही चारा घोटाले में FIR दर्ज करवाई थी, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। इस घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव मुख्य आरोपित थे, जो बाद में अदालत से दोषी करार दिए गए और फिर उन्हें सजा भी हुई।

बता दें कि, अगस्त 2021 तक अमित खरे के पास केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी था। अपने कार्यकाल में उन्होंने डीडी झारखंड समेत एक दर्जन सैटेलाइट चैनल लॉन्च करवाए। अमित खरे ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में रहते हुए डिजिटिल मीडिया नियमों में परिवर्तन में भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने दूरदर्शन के दायरे का विस्तार किया। झारखंड सहित देश के तक़रीबन एक दर्जन राज्यों में DD फ्री डिश की सेवा आरंभ करवाई। नवंबर 2018 में उनकी अगुवाई में गोवा में अंतरारष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन हुआ। उन्होंने झारखंड में लोगों को डायन-बिसाही जैसे अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक किया। इसके खिलाफ सख्त कानून बनवाए। अमित खरे एकीकृत बिहार के कई जिलों में पदस्थ रहे। उन्होंने बिहार में मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षा कंबाइंड करा कर मेधा घोटाले पर रोक लगाई थी। उनकी पत्नी निधि खरे फिलहाल केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में अपर सचिव के पद पर पदस्थ हैं।

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