जानिए कितना प्राचीन है योगा और कितने है इसके प्रकार

जानिए कितना प्राचीन है योगा और कितने है इसके प्रकार
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योग एक बहुत प्राचीन प्रथा है जो हमारी संस्कृति और परंपरागत ज्ञान का हिस्सा है। योग की उत्पत्ति लगभग 5000 वर्ष पहले हुई थी, जब महर्षि पतञ्जलि ने अपनी योगसूत्रों के माध्यम से इसे संकलित किया। हालांकि, योग का अभ्यास और उपयोग इससे भी पहले से ही भारतीय धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं में प्रचलित था।

योग की प्राचीनता और महत्व भारतीय ग्रंथों, जैसे कि वेद, उपनिषद, गीता, और पुराणों में भी दर्शाई गई है। यह ध्यान, आसन, प्राणायाम, मनःशांति, और आत्म-सम्यक्ता को प्रमाणित करने का एक प्रमुख साधन है। योग का अभ्यास द्वारा व्यक्ति अपने शरीर, मन, और आत्मा के संगम को प्राप्त कर सकता है और स्वस्थ, समृद्ध, और आध्यात्मिक जीवन जी सकता है। इसलिए, योग भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण और प्रचीन हिस्सा है जो हमें शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करता है।

योग के कई प्रकार होते हैं जो विभिन्न उद्देश्यों और अभ्यासों पर आधारित होते हैं। यहां कुछ प्रमुख योग प्रकार हैं:

हठ योग: हठ योग में शरीर की अभ्यास को महत्व दिया जाता है। इसमें आसन, प्राणायाम और शुद्धि तकनीकें शामिल होती हैं।

राज योग: राज योग में मन को शांत करने, ध्यान को विकसित करने और आत्मा को जागृत करने का ध्यान रखा जाता है।

भक्ति योग: भक्ति योग में भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण की प्राथमिकता होती है। इसमें पूजा, मंत्र जाप, गान और सेवा शामिल होती हैं।

कर्म योग: कर्म योग में कर्म के माध्यम से सेवा, निष्काम कर्म और समर्पण का महत्व बताया जाता है।

ज्ञान योग: ज्ञान योग में ज्ञान की प्राप्ति, विचार, स्वविचार और आत्मज्ञान की प्राथमिकता होती है।

कुण्डलिनी योग: कुण्डलिनी योग में शक्ति कुंडलिनी के जागरण और ऊर्ध्वागमन को उन्मुख किया जाता है।

मन्त्र योग: मन्त्र योग में जप, मंत्र और शब्दों का उच्चारण एवं ध्यान के माध्यम से मन को शुद्ध और स्थिर किया जाता है।

हठ योग: हठ योग एक ऐसा प्रकार का योग है जिसमें शारीरिक अभ्यास और तंत्र तकनीकों का महत्व दिया जाता है। यह योग की एक प्रमुख शाखा है और इसका मुख्य लक्ष्य हमारे शरीर, मन, और आत्मा के बीच संतुलन और समरसता स्थापित करना होता है। हठ योग के अभ्यास में आसन, प्राणायाम, मुद्राएं, बंध, शुद्धि, और ध्यान की विभिन्न तकनीकें शामिल होती हैं। ये तकनीकें शरीर की ऊर्जा को शुद्ध करने, शारीरिक अवयवों को मजबूत करने, मानसिक तनाव को कम करने, मन को नियंत्रित करने, और आत्मा के साथ एकीकृतता और समरसता स्थापित करने में मदद करती हैं।

हठ योग के अभ्यास से हम अपने शरीर को आराम और स्थिरता देते हैं, विभिन्न आवाजों और विचारों को शांत करते हैं, और अपने आत्मा के गहरे सत्य को पहचानते हैं। इसके अलावा, हठ योग शरीर के प्राकृतिक गुणों को जागृत करता है, ऊर्जा को निरंतर चंचल होने से बचाता है और मन को शांत और एकाग्र करता है। हठ योग अभ्यास करने से हम शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिरता, धारणा शक्ति, ध्यान की क्षमता, और आध्यात्मिक जागरूकता में सुधार प्राप्त कर सकते हैं। यह हमें अंतर्दृष्टि, आत्म-विश्वास, और आनंद की अनुभूति कराता है।

राज योग: राज योग एक प्रमुख योग प्रकार है जो मन के नियंत्रण और आत्मा की जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य मन को शांत, ध्यानित और एकाग्र करके आत्मा को प्राप्त करना होता है। इसका अभ्यास ध्यान, धारणा और समाधि के माध्यम से किया जाता है। राज योग के अभ्यास में मन को नियंत्रित करने और ध्यान को विकसित करने के लिए अभ्यासों का उपयोग किया जाता है। इसमें आध्यात्मिक साधनाओं और मन की गहराईयों को अन्वेषण करने की प्रक्रिया शामिल होती है। ध्यान के माध्यम से मन को स्थिर, शांत और एकाग्र किया जाता है जिससे आत्मा की अनुभूति होती है।

राज योग का अभ्यास हमें मन के विचारों, आवाजों और अनुभवों का नियंत्रण सिखाता है। इसके माध्यम से हम अपने अंतरंग स्वरूप को समझते हैं और आत्मा की गहराई को अनुभव करते हैं। राज योग के अभ्यास से हम आत्म-विश्वास, अध्यात्मिक ज्ञान, और अचलता का अनुभव करते हैं। इस प्रकार, राज योग हमें अपने मन की नियंत्रण शक्ति को प्राप्त करने, ध्यान की क्षमता को विकसित करने और आत्मा की जागरूकता को स्थापित करने में सहायता करता है। यह हमारे जीवन को स्वस्थ, सुखी और आनंदमय बनाने का मार्ग प्रदान करता है। यह ध्यान, आत्म-अध्ययन और गुरु के मार्गदर्शन के साथ निरंतर अभ्यास की आवश्यकता रखता है। हठ योग अपने व्यायामिक और मानसिक चुनौतियों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसे सही गाइडेंस और संयमितता के साथ करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

भक्ति योग: भक्ति योग एक ऐसा योग प्रकार है जिसमें भक्ति और समर्पण के माध्यम से ईश्वर की उपासना और सेवा की प्राथमिकता होती है। यह योग की एक प्रमुख शाखा है और इसका मुख्य उद्देश्य ईश्वर के साथ अनुबंध और समरसता को स्थापित करना होता है। भक्ति योग के अभ्यास में भगवान के प्रति श्रद्धा, प्रेम, और अनुराग की उपासना होती है। यह योग आस्था, भक्ति और समर्पण की भावना को संजोने और उन्नत करने के माध्यम से हमें ईश्वरीय अनुभव की ओर ले जाता है। भक्ति योग के अभ्यास में पूजा, कीर्तन, आरती, मंत्र जाप, संगीत, कथा सुनना और सेवा करना शामिल होता है। इन अभ्यासों के माध्यम से हम अपने मन को पवित्र करते हैं, ईश्वरीय गुणों को आदर्श बनाते हैं और अपनी आत्मा की उच्चता को प्राप्त करते हैं।

भक्ति योग अभ्यास करने से हम आत्मिक शांति, प्रेम, सम्मोहन, और समृद्धि की अनुभूति करते हैं। यह हमें ईश्वर के साथ संबंध को मजबूत और आनंदमय बनाने में सहायता करता है। इस प्रकार, भक्ति योग हमें आत्मिक संयम, प्रेम, सेवा, और ईश्वरीय उपासना के माध्यम से एकता और समरसता की अनुभूति कराता है। यह हमारे जीवन को आदर्शता और सद्गुणों से परिपूर्ण बनाता है।

कर्म योग: कर्म योग एक योग प्रकार है जो कर्मों के माध्यम से सेवा, निःस्वार्थ कर्म और समर्पण का महत्वपूर्ण ध्यान रखता है। यह योग की एक प्रमुख शाखा है और इसका मुख्य उद्देश्य कर्मों को निष्काम रूप से करने के माध्यम से आत्मा को प्राप्त करना होता है। कर्म योग का अभ्यास करने में हम अपने कर्मों को समर्पित करते हैं, निष्काम भाव से सेवा करते हैं और अपने कर्मों को धार्मिकता, नैतिकता और सत्कर्म में परिवर्तित करने का प्रयास करते हैं। कर्म योग के अभ्यास में हम निःस्वार्थता के साथ अपने कर्मों को पूर्णता और समर्पण के साथ करने की प्रवृत्ति विकसित करते हैं। हम ईश्वरीय योग्यता और धर्म के मार्गदर्शन में अपने कर्मों को संचालित करते हैं।

कर्म योग के अभ्यास से हम अपने मन को स्वयंसेवकता, निष्ठा, और संयम की ओर ले जाते हैं। हमें आपसी भाईचारे, सेवा भाव, और ईश्वरीय समर्पण के महत्व को समझने में मदद मिलती है। इस प्रकार, कर्म योग हमें निःस्वार्थ सेवा, नैतिकता, और आत्मा की उच्चता के मार्ग में ले जाता है और हमारे जीवन को धार्मिकता, समर्पण और समृद्धि के साथ परिपूर्ण बनाता है।

ज्ञान योग: ज्ञान योग एक महत्वपूर्ण योग प्रकार है जो ज्ञान की प्राप्ति, आत्मा के अन्वेषण और आत्मज्ञान की प्राथमिकता पर ध्यान केंद्रित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य ज्ञान के माध्यम से मन को नियंत्रित करके आत्मा की पहचान और समझ को प्राप्त करना होता है। ज्ञान योग के अभ्यास में शास्त्रों का अध्ययन, विचार, स्वाध्याय, संवाद, और आत्म-विचार की प्रक्रिया शामिल होती है। इसके माध्यम से हम अपने मन को स्वयंज्ञान और आध्यात्मिकता के दिशा में विकसित करते हैं।

ज्ञान योग के अभ्यास से हम अपने ज्ञान, विवेक, अन्तर्दृष्टि, और आत्मज्ञान की प्राप्ति करते हैं। हम विचारों, धारणाओं, और ध्यान के माध्यम से अपनी मनःशक्ति को विकसित करते हैं और आत्मा की गहराई को पहचानते हैं। ज्ञान योग का अभ्यास हमें सत्य के अनुभव, संयम, और संज्ञान की अवस्था में ले जाता है। यह हमें मन के विचारों को साक्षात्कार, स्वयंज्ञान और अच्छी बुद्धि में परिणत करता है।इस प्रकार, ज्ञान योग हमें ज्ञान, अध्यात्मिक बुद्धि, सत्यता, और आत्म-विकास की प्राप्ति में मदद करता है और हमारे जीवन को आदर्शता और समृद्धि से परिपूर्ण बनाता है।

कुण्डलिनी योग: कुण्डलिनी योग एक ऐसा योग प्रकार है जिसमें शक्ति कुण्डलिनी के जागरण और ऊर्ध्वागमन को उन्मुख किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारे शरीर, मन और आत्मा की ऊर्जा को शुद्ध करना और सुप्राणिक नाड़ियों को सक्रिय करके उच्चतम चेतना की प्राप्ति करना होता है। कुण्डलिनी योग के अभ्यास में ध्यान, मन्त्र जाप, आसन, और प्राणायाम की विभिन्न तकनीकें शामिल होती हैं। इन तकनीकों के माध्यम से हम कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करते हैं और उसे सुषुम्ना नाड़ी के माध्यम से ऊपरी चक्रों तक ले जाते हैं। कुण्डलिनी योग के अभ्यास से हम अपने शरीर, मन और आत्मा की ऊर्जा को शुद्ध करते हैं और आंतरिक चेतना को जागृत करते हैं। हमारी चेतना को उन्नत करके अद्वैत अनुभव की प्राप्ति होती है।

कुण्डलिनी योग का अभ्यास हमें आंतरिक सुख, शांति, संतुलन, और उच्चतम ज्ञान की प्राप्ति में मदद करता है। यह हमें अपने संपूर्ण प्राणिक शक्ति का अनुभव कराता है और हमें एकता और समरसता की अनुभूति कराता है। इस प्रकार, कुण्डलिनी योग हमें ऊर्जा, चेतना, और अनंत ज्ञान की प्राप्ति में मदद करता है और हमारे जीवन को प्रकाशमय और आनंदमय बनाता है।

मन्त्र योग: मन्त्र योग एक प्रमुख योग प्रकार है जिसमें विशेष मन्त्रों का जाप और ध्यान का अभ्यास किया जाता है। यह योग की एक प्रमुख शाखा है और इसका मुख्य उद्देश्य मन की शांति, ध्यान की क्षमता, और आंतरिक जागरूकता को विकसित करना होता है। मन्त्र योग के अभ्यास में मन्त्रों का जाप, ध्यान, और आवाज की उच्चारण तकनीकें शामिल होती हैं। इन मन्त्रों को नियमित रूप से जाप करने से हमारे मन को शांत, स्थिर और एकाग्र किया जा सकता है। मन्त्र योग के अभ्यास से हम अपने मन को नियंत्रित करते हैं, चिंता और तनाव को कम करते हैं, और आत्मा की ऊर्जा को जागृत करते हैं।

हम अपने अंतरंग स्वरूप को समझते हैं और अपनी आत्मा के साथ संयोग की अनुभूति करते हैं। मन्त्र योग का अभ्यास हमें मन की शुद्धि, आत्मिक शक्ति, और आंतरिक ज्ञान की प्राप्ति में मदद करता है। यह हमें आत्मिक संयम, स्थिरता, और ध्यान की क्षमता प्रदान करता है। इस प्रकार, मन्त्र योग हमें मन की स्थिरता, आत्मा की पहचान, और आंतरिक ज्ञान की प्राप्ति में मदद करता है और हमारे जीवन को स्वास्थ्य, शांति और प्रकाशमय बनाता है।

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