किस तरह मिटाओगे हमें

हर रात कहतीं है एक कहानी।

सुबह लाती है एक कहानी,

रास्ते तो बदलते रहते है।

लेकिन मंजिल रहती है वही पुरानी

में आवाज हुँ तेरे हर एक शब्द को समझता हुँ ।

में अहसास हुँ तेरे हर जज्बात को समझता हुँ।

नहीं पूछता की क्यों दूर है तू मुझसे,

में दिल से तेरे हालात जानता हुँ।

भूलने की कोशिश भी करोगे,

फिर भी भूल न पाओगे हमें।

मुझसे जितना दूर जाओगे,

उतना करीब पाओगे मुझे।

मिटा सकते हो तो मिटा दो,

मेरी हर एक याद को।

लेकिन अपनी सासो से,

किस तरह मिटा पाओगे हमें ।

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