कलब-ओ-नज़र शिकार कर

कलब-ओ-नज़र शिकार कर

ेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर
होश-ओ-ख़िरद शिकार कर, कलब-ओ-नज़र शिकार कर
इशक भी हो हिजाब में, हुस्न भी हो हिजाब में
या तो ख़ुद आशकार हो या मुझे आशकार कर
तू है मुहीत-ए-बेकरां, मैं हूं ज़रा सी आबजू
या मुझे हमकिनार कर, या मुझे बेकिनार कर
मैं हूं सदफ़ तो तेरे हाथ मेरे गुहर की आबरू
मैं हूं ख़ज़फ़ तो तू मुझे गौहर-ए-शाहसवार कर
बाग़-ए-बहशत से मुझे हुकम-ए-सफ़र दीया था कयूं
कार-ए-जहां दराज़ है अब मेरा इंतज़ार कर
रोज़-ए-हसाब जब मेरा पेश हो दफ़तर-ए-अमल
आप भी शरमशार हो, मुझ को भी शरमशार कर