आज कजरी तीज पर जरूर सुननी चाहिए यह पौराणिक कथा

Aug 06 2020 04:00 PM
आज कजरी तीज पर जरूर सुननी चाहिए यह पौराणिक कथा

आप सभी जानते ही हैं कि आज कजरी तीज का पर्व मनाया जा रहा है. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कजरी तीज की पौराणिक व्रत कथा. इस कथा को सभी को सुनना चाहिए और पढ़ना भी चाहिए. आइए जानते हैं इस कथा को.

कजरी तीज की कथा- एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था. भाद्रपद महीने की कजरी तीज आई. ब्राह्मणी ने तीज माता का व्रत रखा. ब्राह्मण से कहा आज मेरा तीज माता का व्रत है. कही से चने का सातु लेकर आओ. ब्राह्मण बोला, सातु कहां से लाऊं. तो ब्राह्मणी ने कहा कि चाहे चोरी करो चाहे डाका डालो. लेकिन मेरे लिए सातु लेकर आओ. रात का समय था. ब्राह्मण घर से निकला और साहूकार की दुकान में घुस गया. उसने वहां पर चने की दाल, घी, शक्कर लेकर सवा किलो तोलकर सातु बना लिया और जाने लगा. आवाज सुनकर दुकान के नौकर जाग गए और चोर-चोर चिल्लाने लगे. साहूकार आया और ब्राह्मण को पकड़ लिया.

ब्राह्मण बोला मैं चोर नहीं हूं. मैं एक गरीब ब्राह्मण हूं. मेरी पत्नी का आज तीज माता का व्रत है इसलिए मैं सिर्फ यह सवा किलो का सातु बना कर ले जा रहा था. साहूकार ने उसकी तलाशी ली. उसके पास सातु के अलावा कुछ नहीं मिला. चांद निकल आया था ब्राह्मणी इंतजार ही कर रही थी. साहूकार ने कहा कि आज से तुम्हारी पत्नी को मैं अपनी धर्म बहन मानूंगा. उसने ब्राह्मण को सातु, गहने, रुपए, मेहंदी, लच्छा और बहुत सारा धन देकर ठाठ से विदा किया. सबने मिलकर कजली माता की पूजा की. जिस तरह ब्राह्मण के दिन फिरे वैसे सबके दिन फिरे... कजली माता की कृपा सब पर हो.

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