फनी शायरियां

फनी शायरियां

 

बर्बाद करना था तो किसी और तरीके से कर लेती 
यूँ बच्चों से “मामू” कहलवाना ज़रूरी था क्या

 


कर न सके इज़हारे मुहब्बत यह हमारी खता थी 
हमें तो बीवी ने पकड़ कर रखा था तू अपनी सुना.

 


मुहब्बत करने वालों का यही अंजाम होता है,
कभी नज़ला कभी बुखार कभी ज़ुकाम होता है.

 

उस से माँगा था फ़क़त , कुछ वक़्त मैंने,
वो नादाँ दे गया एक घडी मुझ को तोहफे में.

 


पेट ख़राब हो तो गोल-गप्पे कैसे खाओगे,
वाह वाह क्या बात है,
पेट ख़राब हो तो गोल-गप्पे कैसे खाओगे, 
तुम तो ठहरे परदेसी साथ किया निभाओगे.

 


लाइफ में जिसको होता है ग़म 
वो पीता है रम

आँखों में जिसके हो टिअर 
वो पीता है बीयर

जिसको लव लगता है रिस्की ,
वो पीता है व्हिस्की

तो फिर पीओ वाइन और 
बिंदास मारो लाइन.

 


यह जो चप्पल मैं पहन कर आया हूँ 
मत समझो के इसे चुरा कर लाया हूँ 
यह सब खुदा की देंन है मेरे दोस्त 
उसी के घर से उठा के लाया हूँ.

 


तेरे वादे अगर सच्चे होते 
तो आज हमारे भी अपने दो बच्चे होते.

 


हवाएँ कहती हैं दोस्ती करो 
फ़िज़ाएं कहती हैं प्यार करो

बहारें कहती हैं शादी करो
और घर वाले कहतें हैं

बकवास बंद करो और 
दिल लगा के काम करो.

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