इस अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर लें 'बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं का संकल्प'

बीते कई वर्षों से यह देखने को मिला है कि समाज के हर मुद्दे/कुरीति या बुराई को दूर करने के उद्देश्य से एक विशेष दिवस का सृजन कर उसे उत्साहपूर्वक मनाने की एक जरूरत का एहसास हुआ। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस उसी कड़ी में से एक कहा जाता है। तो चलिए जानते है इस दिन का इतिहास और उद्देश्य...

अंतर्राष्ट्रीय बालिक दिवस का इतिहास: विश्व के बड़े पर गर्ल चाइल्ड डे मनाने की शुरुआत एक गैर-सरकारी संगठन 'प्लान इंटरनेशनल' प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई थी। इस संगठन ने "क्योंकि मैं एक लड़की हूं" नाम से एक अभियान की नीव रखी थी।  इसके उपरांत इस अभियान को इंटरनेशनल लेवल पर ले जाने के लिए कनाडा सरकार से संपर्क किया गया। कनाडा सरकार ने 55वें आम सभा में इस प्रस्ताव को पेश किया। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2011 में 19 दिसंबर को इस प्रस्ताव को पारित कर दिया और इस दिन को सेलिब्रेट करने के लिए 11 अक्टूबर का दिन चुना। इसके उपरांत पहला इंटरनेशनल गर्ल्स डे 11 अक्टूबर, 2012 को सेलिब्रेट किया गया। तब से हर वर्ष इस दिन को सेलिब्रेट किया जाने लगा।  भारत सरकार ने भी बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए कई बड़ी योजनाओं को भी लागू किया है इसके अंतर्गत "बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं" एक उल्लेखनीय योजना है. जिसके अतिरिक्त केंद्र और राज्य सरकार भी अन्य महत्वपूर्ण योजनायें शुरू कर रही है. भारत में भी 24 जनवरी प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय बालिका दिवस सेलिब्रेट किया जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय बालिक दिवस मनाने का उद्देश्य: इंटरनेशनल गर्ल्स डे को मनाने का उद्देश्य लोगों के बीच 'बेटी बचाओं और बेटी पढ़ाओं' के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है। जिससे वो आने वाली सभी चुनौतियों और परेशानियों का डटकर मुकाबला कर सके।

अंतर्राष्ट्रीय बालिक दिवस 2021 की थीम: इस साल डिजिटल पीढ़ी, हमारी पीढ़ी (Digital Generation. Our generation) थीम के साथ सेलिब्रेट किया जा रहा है।

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