VIDEO : नोट छापने की मशीन के बारे में ये बातें सुनकर दंग रह जाएंगे आप

दोस्तों, जीवन में एक बार ही सही लेकिन हर व्यक्ति के दिमाग में यह बात जरूर आती है कि काश मेरे पास नोट छापने की मशीन होती. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सरकार के पास तो नोट छापने की मशीन है, फिर वह गरीबी हटाकर सभी को अमीर क्यों नहीं बना देती. आखिर क्यों एक किसान फसल खराब होने पर अपनी जान दे देता है, क्यों एक युवा, बेरोजगार होकर पैसों के लिए परेशान रहता है, सरकार उसे पैसे देकर अमीर बना सकती है क्योंकि सरकार के पास तो नोट छापने की मशीन है.

बेशक आपको यह सभी बाते परेशान करती होगी लेकिन इस वीडियो के देखने के बाद आपका यह डाउट हमेशा के लिए क्लियर हो जाएगा. आपको बता दें, सरकार भी मनचाहा पैसा नहीं छाप सकती क्योंकि देश की सेंट्रल बैंक की नज़र उस पर होती है. उसी तरह भारत देश की सेंट्रल बैंक RBI है जिसकी इन सभी कार्य पर नज़र होती है. देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नोट छापे जाते है क्योंकि इसका सीधा कनेक्शन देश की महंगाई से होता है.  

जी हाँ! यदि देश में लिमिट से ज्यादा करंसी होगी तो महंगाई बढ़ जाएगी. वैसे इस फार्मूले को देखिए Sum of  value all goods and services produced = Sum of all currency present. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार करंसी छापती है. खैर दो देशों ने लिमिट से ज्यादा करंसी छापने की कोशिश की थी लेकिन अंत में उन्हें रोकना पड़ा. इसमें पहला नाम जर्मनी का आता है. जर्मनी में प्रथम विश्व युद्ध के वक़्त इस देश ने अलग-अलग दूसरे देशों से पैसा उधार ले लिया. इस वर्ल्ड वॉर में जर्मनी की हार हुई जिसके चलते देश को बहुत नुकसान हुआ.
 
इसके बाद यहाँ सरकार ने बहुत सारी करंसी छाप ली. लिमिट से ज्यादा करंसी छापने की वजह से यहाँ की करंसी डीवैलुएट हो गई. कुछ ऐसा ही जिम्बाम्बे में भी देखने को मिला. बात उस वक़्त की है जब इस देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी तब वहाँ भी लिमिट से ज्यादा करंसी छापी गई. इसके बाद का आलम कुछ ऐसा था कि वहां के लोगों को दूध, ब्रेड, दाल-रोटी खाने के लिए भी बहुत पैसा देना पड़ रहा था इसलिए हर देश में आदान-प्रदान की बात को ध्यान में रखते हुए ही करंसी छापी जाती है. इसे हाइपरइन्फ्लेशन भी कहा जाता है. 

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