ओलंपिक पदक हासिल करने के लिए मानसिक मजबूती है जरूरी : ग्राहम रीड

ऑस्ट्रेलिया की साल 1992 बार्सिलोना ओलंपिक की रजत पदक हासिल करने वाली टीम का भाग रह चुके रीड ने बोला है की, ‘ओलंपिक दुनिया की सबसे कठोर प्रतियोगिता होती है इसलिए एक प्लेयर्स को मानसिक रूप से इसकी बराबरी करनी होती है. ’ हॉकी इंडिया के बयान के मुताबिक उन्होंने बोला, ‘बतौर प्लेयर सबसे बड़ी चुनौती होती है जो कार्य कर रहे हो, उस पर ध्यान लगाए रखना. पहले मुकाबले में काफी अधिक भावनाएं होती हैं. जो प्लेयर्स इन भावनाओं को काबू कर सकता है और स्ट्रेटेजी पर कायम रहता है, वह आगे रहता है. ’ 

खेल के सभी पहलुओं में सुधार करने की आवश्यकता है, कोच रीड ने टीम को मानसिक रूप से मजबूती हासिल करने पर जोर दिया है. कोच रीड ने आगे बोला, ‘अगले इन बारह महीनों में हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती अनिश्चितता को लेकर होने वाली है. ऐसी बेहद सारी चीजें होती हैं जो होगी लेकिन उन पर हमारा नियंत्रण नहीं हो पाएगा. हमें केवल उन चीजों के बारे में सोचना चाहिए, जिन्हें हम नियंत्रण कर सकते हैं. ’

बता दें की कोच रीड ने बोला, ‘हम केवल इस चीज पर काबू रख सकते हैं कि हम कितनी कठोर मेहनत करें, कितनी अच्छी तरह हम ट्रेनिंग करें और हमारा फिटनेस लेवल कैसा हो. हालांकि, मानसिक रूप से मजबूती निश्चित रूप से एक अहम चीज होगी और भारतीय प्लेयर्स में मुश्किल परिस्थितियों से निपटने की क्षमता जन्मजात है.’

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