हिन्दूधर्म में रामचरित मानस की महत्ता के बारे में जानिए

हिन्दूधर्म में रामचरित मानस की महत्ता के बारे में जानिए
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हिन्दू धर्मग्रंथों में भगवान राम और उनके चरित्र की महिमाओं को व्यक्त करता महाकाव्य रामचरित मानस की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में किया था जिसके अध्ययन मात्र से भी मनुष्य के सभी संकटों का क्षरण होकर परम सुख की प्राप्ति होती हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो भी व्यक्ति किसी अनदेखे दर का सामना या विपत्तियों से घिरा हुआ महसूस करता हैं यदि वो मंगलवार या शनिवार को रामचरितमानस का पाठ करता हैं तो उस पर छाने वाले विपत्तियों के बदल को श्रीराम भगवान हटा देते हैं तथा उस पर सुखों की वर्षा करते हैं. 

ऐसी मान्यता हैं कि जब भी घर पर रामायण पाठ हो रहा हो तो उस पूर्ण पाठ में से सुंदरकांड का पाठ घर के किसी सदस्य को ही करना चाहिए. इससे घर में सकारात्मक शक्तियों का प्रवाह होता है. इस पाठ को अपने जीवन में करने वाले विद्यार्थियों को बुद्धि का वरदान प्राप्त होता हैं तथा वह अपने मन को एकाग्र कर सफलता प्राप्त करते हैं.

रामचरित मानस का पाठ करने से घर में दरिद्रता हटती हैं और आलस्य का नाश होता हैं. यदि कोई स्त्री नियमित रूप से शनिवार को राम परिवार की हनुमान सहित प्रतिमा के सामने चमेली का दीपक जलाकर सुन्दरकांड का पाठ करती है या किसी ब्राह्मण के द्वारा करवाती है तो उसका घर, पति तथा बच्चे हर प्रकार की विपदा से बचे रहते हैं साथ ही घर में सुख और समृद्धि भी आती हैं. यदि यह पाठ साप्ताहिक ना हो सके तो भी कम से कम एक बार माह में सुंदरकांड घर में अवश्य ही करना चाहिए.

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