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रतन के विचार जो देते है हमें सिख

रतन के विचार जो देते है हमें सिख

जर्मनी एक उच्च औद्योगिक देश है। अपने लोग वहाँ आलीशान जिंदगी के बारे में सोचते हैं। हमने वहाँ खाना खाते हुए एक युवा जोड़े को देखा जो वहाँ भोजन कर रहा था। उनकी प्लेट में केवल दो व्यंजन और मेज पर जूस के दो डिब्बे थे। क्या ऐसा साधारण भोजन रोमांटिक हो सकता है। एक और टेबल पर कुछ बुढ़ी महिलाएं थी, उनकी प्लेट में भी भोजन के 1.2 बिट्स थे। हम भूखे थे, तो हमने अधिक भोजन का आदेश दिया, हमारे द्वारा भोजन कर लेने के बाद मेज पर भोजन का एक तिहाई हिस्सा अभी भी झुठा बच गया था।

जब हम रेस्तरां से जाने लगे तोे कुछ बुढ़ी महिलाओं ने हमसे अंग्रेजी में बात की, हम समझ गए थे कि वे हमें इतना भोजन बर्बाद कर देने के बारे में दुखी थे, मेरे सहयोगी ने उन बुढ़ी महिलाओं को बताया, हमने अपने भोजन के लिए भुगतान किया है, यह हम पर छोड़ दो कि हमें कितना खाना है । लेकिन बुढ़ी महिलाएं गुस्से में थी, उनमें से एक ने तुरंत अपने हाथ में फोन लेकर और किसी को फोन किया। थोड़ी देर के बाद, सामाजिक सुरक्षा संगठन से वर्दी में एक आदमी आ गया। विवाद क्या था जानने पर, उसने हम पर 50 यूरो जुर्माना जारी कर दिया, हम सब चुप रहे। एक अधिकारी ने कठोर आवाज में हमें बताया, आप जितना उपभोग कर सकते हैं उतना आर्डर दिजीये , हालांकी पैसा तुम्हारा है लेकिन संसाधनों पर समाज का भी उतना ही हक जितना की आपका।

दुनिया में बहुत से लोग संसाधनों की कमी का सामना कर रहे है, आप संसाधनों को इस तरह से बर्बाद नहीं कर सकते । इस समृद्ध देश के लोगों की मानसिकता ने हम सबको शर्म में डाल दिया। हमें वास्तव में इस पर चिंतन करने की जरूरत है। हमारा देश संसाधनों में बहुत अमीर नहीं है, परंतु अपनी शान दिखाने के लिए हम बड़ी मात्रा में आर्डर दे देते हैं और कई लोगों का भोजन बर्बाद कर देते हैं यह सही है कि पैसा तुम्हारा है लेकिन संसाधन समाज के लिए हैं और समाज का भी उतना ही अधिकार है। जितना आप का अधिकार उन पर है।