पेट्रोल-डीजल में वैट कटौती होते ही चिदंबरम ने मानी अपनी गलती

नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने आज यानी रविवार को इस बात को स्वीकार किया कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित ईंधन की कीमतों पर कर कटौती के बारे में तथ्य उनके पहले के दावे के विपरीत हैं। जी दरअसल बीते शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूक्रेन पर रूस के युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण बढ़ते ईंधन की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 6 रुपये लीटर की कटौती की घोषणा की। ऐसे में वित्त मंत्री ने राज्यों से आम आदमी को राहत देने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट कम करने का भी आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि, "मैं सभी राज्य सरकारों, विशेषकर उन राज्यों से, जहां अंतिम दौर (नवंबर 2021) के दौरान कटौती नहीं की गई थी, को भी इसी तरह की कटौती लागू करने और आम आदमी को राहत देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती हूं।" वहीं अब चिदंबरम ने कीमतों में कटौती और राज्यों से भी इसका पालन करने के लिए सीतारमण के अनुरोध पर एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण लेते हुए दावा किया है कि, 'राज्यों से किया गया वित्त मंत्री का आह्वान व्यर्थ है। जब वह केंद्रीय उत्पाद शुल्क में एक रुपये की कटौती करती हैं, तो उस रुपये का 41 पैसा राज्यों का होता है। इसका मतलब है कि केंद्र ने 59 पैसे और राज्यों ने 41 पैसे की कटौती की है। इसलिए उंगली मत उठाइए।'

आप देख सकते हैं उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, "असली कटौती तब होगी जब केंद्र पेट्रोल और डीज़ल पर लगने वाले उपकर में कटौती करे (जो राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है)।" आप सभी को बता दें कि आज यानी रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि सीतारमण ने कर कटौती की घोषणा करते समय "उत्पाद शुल्क" शब्दों का इस्तेमाल किया था, लेकिन कटौती अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में थी, जिसे राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है। जी दरअसल चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, “मैंने जो कल कमी का पूरा बोझ केंद्र पर पड़ने की बात कही थी उसे सुधार करता हूं।''

हालांकि, उन्होंने तर्क दिया है कि 'राज्यों को ईंधन पर "शुल्क के हिस्से के रूप में बहुत कम" मिल रहा है क्योंकि उनका राजस्व पेट्रोल और डीजल पर वैट से है। मुझे आश्चर्य है कि क्या वे उस राजस्व को छोड़ने का जोखिम उठा सकते हैं जब तक कि केंद्र ने और अधिक धन हस्तांतरित नहीं किया या उन्हें अधिक अनुदान नहीं दिया।"

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