गुप्त नवरात्रि आज से, शुरू हुआ देवी आराधना का सिलसिला

Feb 09 2016 12:53 PM
गुप्त नवरात्रि आज से, शुरू हुआ देवी आराधना का सिलसिला

नवरात्रि माता की आराधना का पर्व शक्ति की भक्ति का त्यौहार ऐसा अवसर जब इस सृष्टि के रचनाकार की शक्ति मानव के सबसे समीप होती है। इस शक्ति की आराधना कर मानव दीव्यता का अनुभव करता है यही नहीं व्यक्ति की प्रत्येक मनोकामना पूर्ण हो जाती है। देवी पुराण के अनुसार 1 वर्ष में 4 नवरात्रि होती है। इस वर्ष के पूर्व चैत्र माह में प्रथम नवरात्रि होती है।

4 थे माह में आषाढ़ में दूसरी, अश्विन मास में 3री और किसी प्रमुख नवरात्रि में 11 वें माह माघ माह में 4 थी नवरात्रि मनाने का अवसर धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। यूं तो वर्ष में इन नवरात्रियों को अलग - अलग तरह से जाना जाता है। एक नवरात्रि जो आश्विन मास में आती है उसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है।

जो आषाढ़ मास में आती है वह अलग होती है और चैत्र नवरात्रि और भी अलग होती है। इस नवरात्रि को वासंती नवरात्रि भी कहते हैं। एक अन्य नवरात्रि 11 वें माह में माघ माह में आती है। जिसे 4 थी नवरात्रि कहा जाता है। इसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। आश्विन मास की नवरात्रि को प्रमुख नवरात्रि कहा गया है।

इस नवरात्रि में साधु - सन्यासी और आम गृहस्थ भी देवी शक्ति की आराधना करते हैं। माघ मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि अर्थात् आज से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो गई है। हां, आषाढ़ मास की नवरात्रि और माघ मास की नवरात्रि ऐसी नवरात्रि होती है जो कि छुपी हुई होती है। यह नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कहलाती है।

इसे लेकर यह कहा गया है कि यह नवरात्रि विशेष आराधना, पूजन और अर्चन के लिए विशेष महत्व रखती हैं। इस वर्ष माघ मास की गुप्त नवरात्रि 9 फरवरी से प्रारंभ होकर 17 फरवरी तक चलेगी। गुप्त नवरात्रि के अंतर्गत अन्य नवरात्रियों का पूजन भी किया जाना चाहिए। इन नौ दिनों के दौरान उपवास और व्रत का संकल्प लेना होता है। हर दिन घटस्थापना करने की बात भी कही गई है। 

इसके बाद हर दिन प्रातः और शाम के समय दुर्गा माता और मां शक्ति का पूजन किया जाता है। इस नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन के ही साथ नवरात्रि का उद्यापन किया जाता है। इस गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक क्रियाओं की सिद्धि की जाती है, श्री महाकाल आराधना के लिए भी यह नवरात्रि महत्व  रखती है। देवी भगवती के साधक इस दौरान कड़े नियमों के ही साथ व्रत और साधना करते हैं। इस नवरात्रि में श्री महाकालि मां, तारा देवी, श्रीमद् त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी का पूजन किया जाता है।