गेहूं के निर्यात पर बैन में भारत सरकार ने छूट दी, मिस्र ने किया था अनुरोध

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने मंगलवार को गेहूं के एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील देने का ऐलान किया है। इसमें कहा गया है कि जहां कहीं भी गेहूं की खेप को जांच के लिए सीमा शुल्क विभाग को सौंप दिया गया है और 13 मई को या उससे पहले उनके सिस्टम में उन खेपों को रजिस्टर कर लिया गया है, उन्हें निर्यात के लिए इजाजत दी जाएगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि, 'यह फैसला लिया गया है कि जहां कहीं भी गेहूं की खेप को जांच के लिए सीमा शुल्क को सौंप दिया गया है और 13.5.2022 को या उससे पहले उनके सिस्टम में पंजीकृत किया गया है, ऐसी खेपों को निर्यात करने की इजाजत दी जाएगी।'

केंद्र ने मिस्र की तरफ जाने वाली गेहूं की खेप को भी मंजूरी दे दी है, जो पहले से ही कांडला बंदरगाह पर लोड हो रही थी। दरअसल इससे पहले मिस्र सरकार द्वारा कांडला बंदरगाह पर लदान किए जा रहे गेहूं के माल की इजाजत देने का आग्रह किया गया था। सरकारी बयान में कहा गया है कि, 'मिस्र को गेहूं निर्यात में लगी कंपनी मैसर्स मेरा इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने भी 61,500 मीट्रिक टन गेहूं की लोडिंग पूरी करने का आग्रह किया था, जिसमें से 44,340 मीट्रिक टन गेहूं पहले ही लोड किया जा चुका था और सिर्फ 17,160 मीट्रिक टन लोड किया जाना बाकी था। सरकार ने 61,500 मीट्रिक टन की पूरी खेप की इजाजत देने का फैसला किया और इसे कांडला से मिस्र जाने की मंजूरी दी है।' 

बता दें कि गर्मी और लू के कारण गेहूं उत्पादन प्रभावित होने की चिंताओं के बीच भारत ने अपने प्रमुख खाद्यान्न की कीमतों में आई भारी तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से गेहूं के निर्यात पर बैन लगा दिया है। बीते एक वर्ष में गेहूं और उसके आटे की खुदरा कीमतों में 14-20 फीसद की वृद्धि होने के बाद खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला गेहूं कीमत को नियंत्रित करने और पड़ोसी एवं कमजोर मुल्कों की खाद्यान्न आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करेगा।

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