एक बालक का त्याग जो आपको भी कुछ प्रेरणा देता है

Aug 17 2016 05:25 PM
एक बालक का त्याग जो आपको भी कुछ प्रेरणा देता है

प्राचीन ग्रंथों से हमें बहुत सी कथाएं प्राप्त होती है जो सत्य होती और हम उन्हीं कथाओं से अपने जीवन में बहुत कुछ सीख सकते है .मार्गदर्शन देने वाले व्यक्ति अपने विचारों को किसी के समक्ष या लिखित रूप में प्रदर्शित करते है. इन्हीं कथाओं में एक ऐसी कथा है.कि एक बार पृथ्वी के एक क्षेत्र में लगातार 12 वर्षों तक बिलकुल भी वर्षा नहीं हुई. वर्षा न होने की वजह से उस सम्पूर्ण क्षेत्र में सूखा फैल गया और सारे तालाब ,नदी-नाले भी सूख गए. कुछ ही दिनों बाद उस क्षेत्र में एक ऋषि आये और उन्होंने इस सूखे हुए क्षेत्र को देखते ही लोगों से कहा-भूख और प्यास से पीड़ित पूरे क्षेत्र के लिए नरमेध यज्ञ करना होगा. इसके लिए हमें  एक व्यक्ति की बलि की आवश्यकता पड़ेगी .

उनकी इस बात को सुनते ही चारों ओर सन्नाटा सा छा गया इसके लिए कोई आगे नहीं आया 
उन सभी को ऐसा देख महात्मा ने कहा-क्या आप सब में ऐसा कोई नहीं है जो बलिदान के लिए आगे आ सके आप किसी में भी इतना साहस नहीं कि स्वयं को प्रस्तुत कर सके?"

उस महात्मा के वचनों को सुनते ही एक बालक की आवाज आई और उसने कहा की यदि किसी एक के बलिदान से सभी की भूख -प्यास मिट सकती है और उन्हें नया यह जीवन मिल सकता है.तो में आगे आऊंगा, मैं अपना बलिदान देने के लिए आगे आ रहा हूँ.

आप जान सकते है की उस बालक का नाम शतमन्यु था और वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी .पर उसने महात्मा से कहा - कि इस दुनिया में परोपकार से बड़ा और कोई पुण्य नहीं है मुझे एक न एक दिन तो मारना है पर यदि किसी को जीवन दान देकर मरू तो इससे बेहतर क्या  है मेरे लिए, वह अब अपने माता-पिता की आज्ञा लेकर आया और बलि के लिए तैयार हो गया .

अब जब बलि का समय आयाम तो वह बालक बिलकुल निर्भीक भाव से सिंह शावक के समान अपना मस्तक ऊंचा किए हुए बलिवेदी पर जाकर खड़ा हो गया. तब यज्ञाचार्य ने उस बालक से कहा -बालक, सबका अंतिम अभिवादन कर लो" ज्यों ही पुरोहित ने खड्ग हाथ में लिया कि आकाशवाणी होने लगी. चारो और बादल छा गए, देवलोक से पुष्पवर्षा होने लगी,सभी देवताओं ने उसके मन के भावों को देखकर अति प्रशन्न हो गए .और उस क्षेत्र को जगमगा दिया .