ये हैं मिर्ज़ा ग़ालिब की सबसे बेहतरीन और मशहूर शायरियां

दुनिया के सबसे मशहूर शायरों में से एक मिर्जा गालिब का जन्म 27 दिसंबर 1797 को आगरा में हुआ था। जी हाँ और उनका असली नाम मिर्जा असदुल्लाह बेग खान था और मिर्जा गालिब उनका पेन नेम (तखल्लुस) था। आप सभी को बता दें कि आज गालिब न केवल भारतीय उपमहाद्वीप में, बल्कि दुनिया भर में हिन्दुस्तानी समुदाय के लोगों में भी लोकप्रिय हैं। जी दरअसल गालिब को उर्दू, अरबी और फारसी भाषाओं का ज्ञान था और वह उर्दू और फारसी दोनों भाषाओं में शायरियां और गजल लिखते थे। आज हम उनके जन्मदिवस पर आपको बताने जा रहे हैं उनकी सबसे बेहतरीन शायरियां.

“ ‘ग़ालिब’ बुरा न मान जो वाइ’ज़ बुरा कहे
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे” 


“चाहें ख़ाक में मिला भी दे किसी याद सा भुला भी दे,
महकेंगे हसरतों के नक़्श* हो हो कर पाएमाल^ भी !!”

“फ़िक्र–ए–दुनिया में सर खपाता हूँ
मैं कहाँ और ये वबाल कहाँ !!”

 

“जी ढूंढता है फिर वही फ़ुर्सत कि रात दिन,
बैठे रहें तसव्वुर–ए–जानाँ किए हुए !!”


“फिर न इंतिज़ार में नींद आए उम्र भर,
आने का अहद कर गए आए जो ख़्वाब में !!”


“रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल,
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है !!”

“मुहब्बत में उनकी अना का पास रखते हैं,
हम जानकर अक्सर उन्हें नाराज़ रखते हैं !!”


“कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर–ए–नीम–कश को
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता”

 

 “तुम अपने शिकवे की बातें
न खोद खोद के पूछो
हज़र करो मिरे दिल से
कि उस में आग दबी है.”


 

“इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं”


 

“न सुनो गर बुरा कहे कोई,
न कहो गर बुरा करे कोई !!”

 

“रोक लो गर ग़लत चले कोई,
बख़्श दो गर ख़ता करे कोई !!”

 

“तेरे वादे पर जिये हम
तो यह जान,झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते
अगर एतबार होता”

 

“भीगी हुई सी रात में जब याद जल उठी,
बादल सा इक निचोड़ के सिरहाने रख लिया !!”


 

“कुछ लम्हे हमने ख़र्च किए थे मिले नही,
सारा हिसाब जोड़ के सिरहाने रख लिया !!”

 

“वो रास्ते जिन पे कोई सिलवट ना पड़ सकी,
उन रास्तों को मोड़ के सिरहाने रख लिया !!”


“हम जो सबका दिल रखते हैं
सुनो, हम भी एक दिल रखते हैं”


 

“इक शौक़ बड़ाई का अगर हद से गुज़र जाए
फिर ‘मैं’ के सिवा कुछ भी दिखाई नहीं देता”

 

“ज़िन्दग़ी में तो सभी प्यार किया करते हैं,
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा !!”

 

“दिल–ए–नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है”

 

“इक क़ुर्ब जो क़ुर्बत को रसाई नहीं देता,
इक फ़ासला अहसास–ए–जुदाई नहीं देता”

 

“तू मिला है तो ये अहसास हुआ है मुझको,
ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिए थोड़ी है ….”

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