जल्द ही गगनयान मिशन को दिया जाएगा रूप, भारत के 4 पायलट ने पूरी की ट्रेनिंग

इंडिया के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए चार 'टेस्ट पायलट' ने रूस में अपनी एक वर्ष की ट्रेनिंग पूरी कर चुके है। गगनयान मिशन के अंतर्गत 2022 तक भारत के अंतरिक्षयात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की परियोजना बना रहे है। मिशन के लिए इंडियन एयरफोर्स के 4 पायलट को चुना गया था। वे बीते वर्ष फरवरी से ही मास्को के नजदीक यूरी गगारिन रिसर्च ऐंड टेस्ट कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग को पूरा कर रहे है। अब इनकी ट्रेनिंग भारत में भी होगी। गुरुवार को केंद्र सरकार ने कहा था कि इनकी ट्रेनिंग इस साल मई या जून से शुरू हो जाएगी।

रूस के स्टेट स्पेस कॉरपोरेशन के प्रमुख दिमित्री रोगोजिन ने सोमवार को अपने टेलिग्राम चैनल पर कहा, “शाम को हमने गगारिन रिसर्च ऐंड टेस्ट कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में इंडियन अंतरिक्षयात्रियों से मीटिंग की, जिन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी की है। हमने इंडियन राजदूत से भी भविष्य के द्विपक्षीय स्पेस प्रोजेक्ट्स को लेकर वार्तालाप  की।” इन भारतीय पायलटों की ट्रेनिंग के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और रूस की लॉन्च सर्विस प्रोवाइडर ग्लावकॉसमोस ने जून 2019 में हस्ताक्षर कर दिए थे।  जंहा इस बात का पता चला है कि इस अंतरिक्ष मिशन के लिए ट्रेनिंग लेने वाले 4 पायलटों में भारतीय वायुसेना के एक ग्रुप कैप्टन और तीन विंग कमांडर शामिल हैं। ये ट्रेनिंग 10 फरवरी 2020 को शुरू हुई थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से अस्थाई रूप से प्रभावित हो गई थी।

जिसके पूर्व ISRO के अधिकारियों ने कहा  था कि रूस में ट्रेनिंग लेने के उपरांत, ये पायलट भारत में मॉड्यूल स्पेसिफिक ट्रेनिंग लेंगे। उन्हें भारत में ISRO द्वारा डिजाइन की गई क्रू और सर्विस मॉड्यूल के बारे में जानकारी  जाने वाली है। केंद्र सरकार ने गगनयान मिशन के लिए 10 हजार करोड़ रुपए की मंजूरी दी थी। 2022 में देश की आजादी की 75वीं सालगिरह के अवसर पर इस मिशन को लॉन्च किया जाने वाला है।

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