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भाजपा के खिलाफ लड़ो, 'वायनाड' से क्यों ? राहुल गांधी से केरल की लोकसभा सीट छीनना चाह रही वामपंथी पार्टी
भाजपा के खिलाफ लड़ो, 'वायनाड' से क्यों ? राहुल गांधी से केरल की लोकसभा सीट छीनना चाह रही वामपंथी पार्टी

कोच्चि: दक्षिणी राज्य केरल की सत्तारूढ़ CPI(M) ने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के लेफ्ट शासित राज्य से लोकसभा चुनाव लड़ने के फैसले की आलोचना की है। CPI(M) का कहना है कि राहुल गांधी को राज्य स्तरीय प्रतिद्वंद्विता में फंसने के बजाय भाजपा की 'फासीवादी नीतियों' से लड़ने पर फोकस करना चाहिए। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को करारी हार मिलने के एक दिन बाद CPI(M) के केरल राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा है कि राहुल को ऐसी सीट से चुनाव लड़ना चाहिए, जहां भाजपा का कोई प्रभाव हो, और केरल में भाजपा का कोई असर नहीं है।   

CPI(M) नेता गोविंदन ने आगे कहा कि, 26 विपक्षी दलों ने भाजपा को हराने के लिए 'INDIA' गठबंधन बनाया है, गठबंधन के पास एक अच्छा मौका होगा, यदि वह भाजपा के खिलाफ वोट करने वाले लोगों को एकजुट कर लेती है। उन्होंने सवाल किया कि, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने भाजपा के फासीवाद के खिलाफ लड़ने के लिए एक व्यापक मंच तैयार किया है। लेकिन क्या उन्हें (राहुल गांधी) केरल जैसे राज्य में भाजपा को हराने के लिए चुनाव लड़ना चाहिए या फिर ऐसे क्षेत्र में जहां भाजपा का प्रभाव है? 
 
वामपंथी नेता गोविंदन ने कहा कि, यह फैसला कांग्रेस पार्टी को करना है कि राहुल को केरल से चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि, CPI(M) को यहां चुनाव नहीं लड़ने के लिए कहने की जरूरत नहीं है। सामान्य शालीनता वाला कोई भी नेता जानता है कि यह मुकाबला करने का स्थान नहीं है। गोविंदन ने कहा कि, पहली UPA सरकार के दौरान, भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए CPI (M) ने कांग्रेस का समर्थन किया था और यही हमारी पॉलिटिक्स है।  
 
3 राज्यों में विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने से इनकार करने पर कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए गोविंदन ने कहा कि यदि भाजपा विरोधी वोट एकजुट हो गए होते, तो देश का सियासी परिदृश्य बदल चुका होता। उन्होंने कहा कि, तीनों राज्यों में जहां भाजपा जीती है, उसे 50 फीसदी वोट भी नहीं मिले। बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर महज 37 फीसदी वोट मिले थे। इसका मतलब है कि 63 फीसदी आबादी भाजपा के खिलाफ है। गोविंदन ने कहा कि कांग्रेस में न तो INDIA गठबंधन का नेतृत्व करने का सामर्थ्य है और न ही अकेले भाजपा से मुकाबला करने की ताकत है। केरल में कांग्रेस के बारे में सोचो। क्या इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के समर्थन के बगैर, राहुल गांधी वायनाड में चुनाव लड़ सकते हैं? मुस्लिम लीग यहां कांग्रेस गठबंधन UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) की रीढ़ है। तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी यही हालत है।  

बता दें कि, 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था, एक अपनी पारम्परिक सीट अमेठी से और दूसरा केरल की वायनाड सीट से। जिस अमेठी से संजय गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी लगातार जीतते रहे, और खुद राहुल गांधी इसी सीट से लगातार 3 बार (2004, 2009 और 2014) सांसद बने, उस सीट पर राहुल 2019 में स्मृति ईरानी से 55000 वोटों से हार गए थे और अपने परिवार का गढ़ गंवा बैठे। हालाँकि, उसी लोकसभा चुनाव में राहुल दूसरी सीट वायनाड, जो मुस्लिम बहुल सीट है, से 4 लाख वोटों से जीते थे। यहाँ मुस्लिम लीग ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया था, इस सीट पर भाजपा का कोई प्रभाव नहीं था, यही कारण है कि, अब वामपंथी नेता कह रहे हैं कि, राहुल गांधी को भाजपा के खिलाफ लड़ना चाहिए, न कि अपने ही साथियों के खिलाफ। बता दें कि, केरल में वामपंथी पार्टियों का काफी जनाधार है और वो विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA का भी हिस्सा है। 

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