फेडरल की दरें तय करेगी शेयर मार्केट की चाल

मुंबई : शेयर मार्केट की चाल कभी नीचे तो कभी ऊपर हो रही है. और अब यह तथ्य सामने आ रहा है कि अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने या न बढ़ाने का फैसला न सिर्फ भारतीय शेयर बाजारों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का कारोबारी मनोबल भी तय होने वाला है. इस मामले में जायफिन एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवेंद्र नेवगी का कहना है कि "यदि फेडरल ओपेन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) दर नहीं बढ़ाने का फैसला करती है, तो हमारी अपनी नीतिगत दर में कटौती की उम्मीद में बाजार में कुछ समय के लिए तेजी आने की उम्मीद है लेकिन अनिश्चितता फिर भी कायम रहने वाली है."

अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की नीति निर्मात्री समिति गुरुवार को मौद्रिक नीति की घोषणा करेगी. और इसके साथ ही यह भी बता दे कि यहाँ देश में भी भारतीय रिजर्व बैंक 29 सितंबर को मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करने वाला है. फेड द्वारा दर बढ़ाने से भारत सहित सभी उभरते बाजारों में विदेशी निवेशक बड़े स्तर पर बिकवाली करेंगे. इसके साथ ही डॉलर दुनिया की कई अन्य प्रमुख मुद्राओं, सोना तथा अन्य संपत्तियों के मुकाबले मजबूत होगा. फेड की दर बढ़ने से भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका से लिया जाने वाला ऋण भी महंगा होगा, जिससे उनका मार्जिन प्रभावित होगा.

गौरतलब है कि विदेशी निवेशकों के द्वारा अगस्त से अब तक भारतीय शेयर बाजारों में करीब तीन अरब डॉलर की बिकवाली की गई है. उक्त मामले में हेम सिक्युरिटीज के निदेशक गौरव जैन का कहना है कि "यदि फेड की दर बढ़ाई जाती है तो इससे बाजार में तत्काल गिरावट आएगी." यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि ऐसे में रुपये में भी गिरावट देखने को मिल सकती है लेकिन इसे संभालने के लिए रिजर्व बैंक हस्तक्षेप कर सकता है. विश्लेषकों का यह कहना है कि फेड की दर बढ़ने से हालांकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का भी पता चलेगा.

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