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जब बेटी अंदर लड़ रही थी दंगल, तब पिता बाहर बैच रहे थे लंगोट
जब बेटी अंदर लड़ रही थी दंगल, तब पिता बाहर बैच रहे थे लंगोट

भारतीय कुश्ती की चैंपियन 'दिव्या काकरण' को तो हर कोई जानता है. दिव्या एशियन चैम्पियनशिप की सिल्वर मेडलिस्ट रह चुकी है. लेकिन दिव्या अब तक गोल्ड मैडल नहीं जीत पाई है. दिव्या ने काफी छोटी उम्र से ही दंगल में कुश्ती लड़ना शुरू कर दिया था. उन्होंने अच्छो-अच्छो को धूल चटाई है. दिव्या की कामयाबी के पीछे उनके पिता सूरज का बहुत बड़ा हाथ है. शुक्रवार को मध्यप्रदेश के इंदौर में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप में जैसे ही दिव्या ने 68 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीता फिर उसने सीधी दौड़ लगाकर बाहर पहलवानो की लंगोट बैच रहे व्यक्ति के गले में जाकर वह मैडल पहना दिया. वो लंगोट बेचने वाले व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि दिव्या के पिता सूरज थे.

दिव्या के पिता एक लंगोट विक्रेता है. जब भी दिव्या किसी जगह कुश्ती लड़ने जाती है तो उनके पिता स्टेडियम के बाहर बैठकर लंगोट बेचते है. अंदर दिव्या कड़ी मेहनत कर अपना खेल जारी रखती है वही बाहर उनके पिता लंगोट बेचने का व्यवसाय जारी रखते है.

दिव्या काफी सालो की मेहनत के बाद अब देश की युवा और बेहतरीन रेसलर बन गई है. बेटी की तारीफ करते हुए पिता सूरज ने कहा कि, "मैंने पिछले कई सालों में ऐसे बहुत से मूवमेंट को मिस किया है जिनमें रेफरी द्वारा मेरी बेटी को विजेता घोषित किया गया है. मैं स्टेडियम के बाहर बैठकर लंगोट बेचता था. मेरी बेटी हमारा परिवार चला रही है. वह मैच जीतकर पैसे कमाती है और उसी से हमारा घर चल रहा है."

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