मिशन शक्ति: 150 वैज्ञानिकों की दो वर्षों की अथक मेहनत का परिणाम है ये प्रोजेक्ट

Apr 06 2019 06:30 PM
मिशन शक्ति: 150 वैज्ञानिकों की दो वर्षों की अथक मेहनत का परिणाम है ये प्रोजेक्ट

नई दिल्ली: भारत द्वारा एक लाइव सैटलाइट को मार गिराए जाने के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) की ओर से खतरे की आशंका जताए जाने और कई तरह के सवाल उठने के बाद शनिवार को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने मिशन शक्ति को लेकर स्थिति साफ की है।  डीआरडीओ चेयरमैन ने बताया है कि मिशन शक्ति के दौरान भारत ने 300 किलोमीटर से भी कम दूरी के लोअर ऑर्बिट को चुना, जिससे विश्वभर के देशों के स्पेस असेट्स को मलबे से कोई क्षति न पहुंचे। उन्होंने कहा है कि वैसे तो भारतीय इंटरसेप्टर की क्षमता 1000 किलोमीटर तक के ऑर्बिट में सैटलाइट को मार गिराने तक की थी। 

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एजेंसी के प्रमुख जी. सतीश रेड्डी ने स्पष्ट कहा है कि 45 दिनों के अंदर सारा मलबा नष्ट हो जाएगा। दरअसल, नासा की ओर से आशंका जताई गई थी कि सैटलाइट के मलबे से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) को खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस दौरान अभियान की विस्तृत जानकारी प्रदान करने के लिए एक प्रेज़ेंटेशन भी दिया गया। जिसमे बताया गया है कि मिशन शक्ति को पीएम मोदी ने 2016 में मंजूरी दी और रिकॉर्ड 2 वर्षों में लगभग 150 वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक संपन्न किया। 

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रेड्डी ने कहा है कि भारत ने इस तरह का कदम उठाते हुए लक्ष्य को मार गिराने की क्षमता दिखाई तो हमने ऐसे ऑपरेशंस के लिए अपनी क्षमता सिद्ध कर दी है। डीआरडीओ अध्यक्ष ने कहा है कि डिफेंस का सबसे उचित तरीका डिटरेंस है। मिशन शक्ति पर रेड्डी ने कहा है कि देश ने जमीन से ही सीधे लक्ष्य को हिट करने की अपनी क्षमता प्रदर्शित की है और यह डिफेंस के लिए भी कार्य करता है। उन्होंने कहा कि मिलिटरी डोमेन में भी अंतरिक्ष का महत्व बढ़ा है। 

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