राजनीति की ड्रामेबाजी और घडि़याल के आंसू

Apr 24 2015 04:13 PM
राजनीति की ड्रामेबाजी और घडि़याल के आंसू
आपने बचपन में मगरमच्छ और बंदर की कहानी सुनी होगी। जी हां, मगरमच्छ यानि घडि़याल। किस तरह वह बंदर को अपने जाल में उलझाता है और आंसू बहाकर बंदर को अपने साथ चलने के लिए कहता है। यह सब हकीकत में भी होता है। जब कोई ड्रामेबाजी कर नाटकीय अंदाज़ में रोता है तो उस स्थिति को घडि़याली आंसू कहते हैं। 

हाल ही में लोकप्रिय राष्ट्रीय समाचार चैनल आज तक के साथ चर्चा के दौरान पूर्व पत्रकार और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता आशुतोष गुप्ता फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि किसान की आत्महत्या पर राजनीति नहीं होना चाहिए। हालांकि उनके इस मत से कुछ लोगों ने संवेदनाऐं व्यक्त कीं वहीं दूसरी ओर कुछ लोग उनके आंसू को ड्रामेबाजी कहकर घडि़याली होने की बात करते रहे। गजेंद्र तो इस दुनिया से चला गया लेकिन अपने पीछे राजनीति का एक अलग रंग सभी के सामने रख गया।