फिर उठी पाॅर्न साईट्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग

Sep 21 2015 01:15 PM
फिर उठी पाॅर्न साईट्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग

नई दिल्ली : भारत में पोर्न और सैक्स सदैव से ही चर्चा का विषय रहा है। इसे लेकर सरकार और न्यायपालिका में भी तनातनी होती रही है। दूसरी ओर सामाजिक स्तर पर खुले तौर पर इसका विरोध किया जाता है तो व्यक्तिगततौर पर लोग इसे दबे-छुपे तरीके से अपनाते भी हैं। ऐसे में सरकार ने अपने ही निर्णय से पीछे हटते हुए 857 पाॅर्न साईट्स पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया गया। मगर अब फिर से इन साईट्स पर बैन की मांग की जा रही है।

इस मामले में इंदौर के वकील कमलेश वासवानी ने याचिका दायर की। जिस पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनवाई की जा रही है। इस मामले में SCWLA द्वारा स्वयं को पार्टी बनाने की अपील की गई है। महिला वकीलों को कहना रहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक है। स्कूली बच्चों तक पाॅर्न क्लिप पहुंच रही है। स्कूली बच्चे इंटरनेट के इस तरह के प्रयोग के आदी बन रहे हैं। 

कैब के स्टाफ और स्कूल बसों के माध्यम से पोर्न क्लिप बच्चों तक पहुंच रही है। महिला वकीलों ने भी कहा है कि इस मामले में हालात चिंताजनक हैं। SCWLA द्वारा अपील की गई है कि स्कूलों को बसों में जैमर लगाने को कहा गया है जिससे मोबाईल के माध्यम से यह सामग्री इन तक नहीं पहुंच पाए।

इस मामले में यह बात भी कही गई कि पाॅर्न आसानी से पहुंचने वाली सामग्री हो गई है यह स्कूली बच्चों से भी अछूती नहीं रही। कैब, टैक्सी चालकों, कंडेक्टर्स आदि द्वारा सार्वजनिक तौर पर इसे शेयर किया जाता है। जिससे ये सब बच्चों तक पहुंच जाती हैं और इसका भावनात्मक व मनोवैज्ञानिक तौर पर विपरीत असर होता है। कई बार वाहन चालक, कंडक्टर, क्लीनर आदि बच्चों को पाॅर्न देखने के लिए ललचाते हैं और उनके साथ दुष्कर्म करते हैं।