करेंट अफेयर्स :गंगा संरक्षण के साथ नौ परियोजनाओं का शुभारंभ

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने 9 मई 2016 को साहिबगंज, झारखंड में गंगा संरक्षण के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत ग्रामीण स्वच्छता पहल के लिए नौ परियोजनाओं का शुभारंभ किया, इस पहल को झारखण्ड के साहिबगंज ग्राम से लांच किया गया जिसके तहत गंगा के समस्त 83 किलोमीटर विस्तार को इस कार्यक्रम के तहत लाया जाएगा.

इस परियोजना के तीन महत्वपूर्ण उपाय:

• गंगा नदी के तट पर बसने वाले सभी 78 गांवों की खुले में शौच मुक्त बनाने और व्यक्तिगत स्वच्छता के तौर-तरीकों को प्रोत्साहन देना.
• ठोस और तरल अपशिष्टों के प्रबंधन के लिए सृजित उन्नत पहुच बनाना.
• निरंतर उपयोग और बुनियादी ढांचे के रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए कम लागत तथा स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करना तथा गांवों में सफाई करना है.

परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य:

• स्वच्छता तौर-तरीकों के माध्यम से झारखंड में गंगा नदी बेसिन में बसे इन 78 गांवों के 45000 परिवारों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है.
• इन गांवों से गंगा नदी में बहकर जाने वाले अपशिष्ट जल और वर्षा के पानी की गुणवत्ता में सुधार लाना भी है.

इससे संबंधित मुख्य तथ्य:

• डिग्रैडबल (नष्ट करने योग्य) ठोस अपशिष्ट के संग्रह, भंडारण और कम्पोस्ट खाद बनाने और बाइओडग्रैडबल सामग्री के लिए लघु उद्यमों की स्थापना के लिए परियोजना गांवों में 78 इकाइयां स्थापित की जाएंगी.

• 5460 परिवारों को पशु और कृषि अपशिष्ट के लाभदायक उपयोग के लिए कीड़े वाली खाद का उपयोग करने के लिए कम्पोस्ट खाद सुविधाओं को अपनाने में मदद दी जाएगी.

• पशु अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान में मदद के लिए बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए 1860 परिवारों की मदद की जाएगी.
• 40 सामुदायिक शौचालयों के साथ-साथ 8 ग्रामीण स्तर शवदाहगृहों और 32 स्नान घाटों का भी निर्माण किया जाएगा.
• घरों और समुदायिक हैंडपंपों से निकलने वाले फालतू और गंदे पानी का सुरक्षित रूप से निपटान करने के लिए सामुदायिक भागीदारी से 10000 से अधिक सोख गड्ढ़ों का निर्माण किया जाएगा.
• घर से निकलने वाले अपशिष्ट और वर्षा के दौरान बहने वाले पानी के जल्दी और सुरक्षित निपटान के लिए परियोजना गांवों में 152000 मीटर सामुदायिक नेतृत्व में निर्मित खुली चैनल की नालियों का भी निर्माण किया जाएगा.
इस पूरी परियोजना को यूएनडीपी, सामुदायिक संगठनों और गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के समग्र मार्गदर्शन में चलाया जाएगा.

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