सूखा खेत, गिरवी बेटा, क्या करता अन्नदाता ? 'आत्महत्या'

भोपाल: मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार यूँ तो किसानों के हित में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन क़र्ज़ और मौसम की मार झेल रहे किसानों की बदहाली शिवराज सरकार की बेहद लापरवाह छवि पेश करती है.  ऐसे ही मध्य प्रदेश का एक व्यथित किसान, प्रशासन की लापरवाही और नज़रअंदाज़ी की भेंट चढ़ गया. राज्य के बुरहानपुर जिले में एक किसान ने क़र्ज़ से तंग आकर पहले तो बेटे को गिरवी रखा, फिर बेटे को छुड़ाने के तनाव में दुनिया से विदा ले ली.

बुरहानपुर जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर भोलाना गांव में एक किसान अपने खेत में रोज़ाना इस आस से मेहनत करता था, कि खेत में बहाया गया उसका पसीना किसी दिन आशाओं की बारिश बनकर बरसेगा और उसके सपनों की फसल उगेगी, लेकिन पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था न होने के कारण किसान की फसल ख़राब हो गई और उसके सारे सपने उसी सूखी मिटटी में मिल गए. किसान ने बड़ी आस के साथ किसान सहकारी समिति, स्थानीय साहूकारों से खेती के संसाधनों के लिए लोन लिया था.लेकिन पानी की कमी के कारण फसल ख़राब हो जाने से, सबके पेट के लिए अनाज उगाने वाला अन्नदाता खुद ही भूखा रह गया. जब उसके पास खाने को ही कुछ नहीं बचा तो वो क़र्ज़ कैसे चुकाता ? 

ऐसे में कर्जदारों का मुँह बंद करने के लिए उसने अपने बेटे को पड़ोस के गाँव में एक व्यक्ति के यहाँ ढाई लाख में गिरवी रख दिया और कर्जदारों का क़र्ज़ चूका दिया. किन्तु इसके बाद उसे अपने जिगर के टुकड़े की चिंता सताने लगी, जिसे वो ज्यादा दिन तक नहीं सह सका और जीवन भर लड़ते रहे किसान ने आखिर जिंदगी से हार मान ली. किसानों को मुआवज़ा, कर्ज से रहत और बहुत सी बुनियादी सुविधाएं देने के नाम पर ठगने वाले राजनेताओं में से एक ने भी किसान के परिवार की सुध नहीं ली है, उसका बेटा अभी भी गिरवी है और परिजन अपने अंधेरे भविष्य के बारे में सोचकर रह-रह कर सिहर उठते हैं. क्योंकि उनका एकमात्र सहारा भी चंद झूठे वादों की बलि चढ़ चुका है.  

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