भाषा प्रेम की बोलिये

ाषा प्रेम की बोलिये,जब तक देह मे प्राण
क्या जाने कब छूट ले,रह जाये सारे काम।
तेरा मेरा करते करते,बीती सारी जिंदगानी
अंत समय पछता रहे,करते रहे मनमानी।।

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